तेहरान: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई है. डोनाल्ड ट्रंप के हालिया दावों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप के बयानों को पूरी तरह गलत बताते हुए कहा कि अमेरिका न तो दबाव की रणनीति से सफल होगा और न ही बातचीत से उसे कोई खास फायदा मिलने वाला है.
गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बहुत कम समय में कई दावे किए, लेकिन उनमें से एक भी सही नहीं है. उन्होंने साफ कहा कि इन झूठे बयानों के सहारे अमेरिका न युद्ध जीत पाया है और न ही कूटनीतिक बातचीत में उसे सफलता मिलेगी.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर दी चेतावनी
ईरान ने इस मामले को केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रखा, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी कड़ा संदेश दिया. गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर ईरान पर दबाव या नाकाबंदी जारी रहती है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया जा सकता है.
उन्होंने संकेत दिया कि इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही ईरान की अनुमति पर निर्भर हो सकती है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील मुद्दा है.
ट्रंप का दावा क्या था?
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि तेहरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को सौंपने पर सहमत हो गया है और दोनों देशों के बीच समझौता करीब है. उन्होंने यह भी दावा किया कि लगभग छह हफ्तों के तनाव के बाद वार्ता निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है.
ट्रंप के मुताबिक, ईरान परमाणु सामग्री लौटाने को तैयार है और समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना काफी मजबूत है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर समझौता आगे बढ़ता है, तो वह संभावित वार्ता स्थल की यात्रा भी कर सकते हैं.
ईरान ने किया सख्त खंडन
हालांकि, ईरानी सूत्रों और अधिकारियों ने ट्रंप के इन सभी दावों को खारिज कर दिया. उनका कहना है कि न तो यूरेनियम सौंपने को लेकर कोई सहमति बनी है और न ही इस तरह की कोई ठोस बातचीत हुई है.
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट रूप से कहा कि ईरान अपना समृद्ध यूरेनियम किसी भी देश को नहीं भेजेगा. उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका को परमाणु सामग्री देना ईरान के लिए कोई विकल्प नहीं है.
परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का रुख
ट्रंप ने दोहराया कि किसी भी समझौते में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके. उन्होंने यूरेनियम संवर्धन पर अस्थायी रोक के विचार को खारिज करते हुए कहा कि इस पर स्थायी प्रतिबंध जरूरी है.
उनका कहना था कि अगर इस लक्ष्य को हासिल नहीं किया गया, तो इसके गंभीर वैश्विक परिणाम हो सकते हैं. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान इन शर्तों पर सहमत हो चुका है, हालांकि ईरान ने इसे पूरी तरह नकार दिया है.
बातचीत अभी अधूरी, मतभेद बरकरार
ईरानी सूत्रों का कहना है कि मौजूदा वार्ताएं अभी शुरुआती चरण में हैं और किसी अंतिम समझौते से काफी दूर हैं. परमाणु सामग्री के हस्तांतरण जैसे अहम मुद्दों पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.
सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य की बातचीत ईरान की शर्तों पर निर्भर करेगी, जिनका सार्वजनिक खुलासा अभी नहीं किया गया है. इससे साफ है कि दोनों देशों के बीच अभी भी कई बड़े मतभेद बने हुए हैं.
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