भारत में चीतों की पुनर्वास परियोजना को एक नया मोड़ मिला है. शनिवार को चार चीते, जिनमें दो नर और दो मादा शामिल हैं, दक्षिण अफ्रीका से विशेष विमान के जरिए बेंगलुरु पहुंचे हैं. ये चीते अब कर्नाटक के बनरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान में नए घर में बसाए जाएंगे. इस कदम से भारत में चीतों की वापसी के प्रयासों को गति मिलेगी.
दक्षिण अफ्रीका से विशेष विमान में यात्रा
दक्षिण अफ्रीका से लाए गए इन चीतों की यात्रा के दौरान, वन विभाग के कर्मचारी और पशु चिकित्सक पूरी निगरानी में थे. यह सुनिश्चित किया गया कि यात्रा के दौरान चीतों को किसी प्रकार की परेशानी न हो. अब इन चीतों को बेंगलुरु के पास स्थित बनरघट्टा राष्ट्रीय उद्यान में ले जाया जाएगा, जहां उन्हें नए वातावरण में समायोजित करने के लिए आवश्यक देखभाल की जाएगी.
नए माहौल के कारण होने वाली परेशानियों पर ध्यान
कर्नाटक के वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री, श्री ईश्वर बी. खांड्रे ने कहा कि इन चीतों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नए मौसम और माहौल के कारण चीतों को कोई समस्या न हो, इस पर विशेष ध्यान दिया जाए. मंत्री ने बताया, “पहले 30 दिनों तक इन चीतों को क्वारंटाइन में रखा जाएगा ताकि उनकी सेहत पर नजर रखी जा सके और किसी भी संक्रमण की जांच की जा सके.”
कर्नाटक के जंगलों में थे चीते
कर्नाटक में पहले चीते घूमते थे, लेकिन अब वे जंगलों से पूरी तरह गायब हो चुके हैं. मंत्री ने इस बारे में कहा, “हमें इस बात का ख्याल रखना है कि लोगों को चिड़ियाघर या उद्यान में कम से कम चीतों को देखने का मौका मिल सके. इनकी सुरक्षा सबसे अहम है.”
क्या है 'प्रोजेक्ट चीता'?
यह चार चीते भारत सरकार के 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत लाए गए हैं. यह एक वन्यजीव पुनर्वास परियोजना है, जिसे 2022 में शुरू किया गया था. इस परियोजना की शुरुआत सितंबर 2022 में हुई थी, जब नामीबिया से 8 अफ्रीकी चीते भारत लाए गए थे. इन चीतों को मध्य प्रदेश के कुनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा गया था. हाल ही में, कुनो नेशनल पार्क में एक भारतीय जन्मी मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया, जिससे भारत में चीतों की संख्या अब बढ़कर 57 हो गई है.
चीतों की वापसी: एक ऐतिहासिक कदम
भारत में एशियाई चीते साल 1952 में विलुप्त घोषित कर दिए गए थे. इसके बाद, कुछ सालों तक इन्हें भारत में देखा नहीं गया था. अब 'प्रोजेक्ट चीता' के तहत, इस ऐतिहासिक प्रयास से इन शानदार जानवरों की भारत में वापसी हो रही है, जिससे भारतीय वन्यजीवों के संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा.
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