Pakistan Air Force Chief US Visit: ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ पाकिस्तान को सैन्य मोर्चे पर झटका दिया, बल्कि चीन के ‘ताकतवर’ हथियारों की पोल भी खोलकर रख दी. इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान की ओर से लॉन्च की गई चीनी मिसाइलों को भारत के मेड इन इंडिया एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही खत्म कर दिया. नतीजा ये हुआ कि न पाकिस्तान के मिसाइल काम आए और न ही उसके डिफेंस सिस्टम. इस करारी हार ने पाकिस्तान को सोचने पर मजबूर कर दिया कि हथियारों की खरीदारी में उसे अब नई दिशा तलाशनी होगी.
अमेरिकी दौरे पर पाकिस्तानी वायुसेना प्रमुख
इसी के चलते अब पाकिस्तान एक बार फिर अपने पुराने साथी अमेरिका की ओर देख रहा है. पाकिस्तानी एयरफोर्स चीफ जहीर अहमद बाबर सिद्धू हाल ही में अमेरिका दौरे पर पहुंचे हैं. यह लगभग एक दशक बाद पहला मौका है जब पाकिस्तान का कोई एयरफोर्स प्रमुख अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर गया है. उनका उद्देश्य साफ है—अमेरिका से भरोसेमंद और एडवांस्ड हथियार हासिल करना.
F-16 ब्लॉक 70 और HIMARS पर नजर
पाकिस्तान की नजर इस बार F-16 ब्लॉक 70 फाइटर जेट, AIM-7 स्पैरो मिसाइल और HIMARS रॉकेट सिस्टम पर है. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना ने अमेरिकी एयरफोर्स चीफ जनरल डेविड एल्विन और अन्य वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों से इस सिलसिले में मुलाकात भी की है. पाकिस्तान को एहसास हो गया है कि चीनी HQ-9P और HQ-16 डिफेंस सिस्टम भारतीय तकनीक के सामने बेअसर हैं, और इन्हीं कारणों से वो अमेरिका की ओर लौट रहा है.
चीन की तकनीक पर अविश्वास
भले ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन का सबसे बड़ा समर्थक बना रहे, लेकिन रक्षा मामलों में उसका भरोसा अब भी अमेरिका पर ही कायम है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने चीन निर्मित मिसाइल डिफेंस सिस्टम को जिस आसानी से भेदा, उसने पाकिस्तान के रणनीतिकारों को झकझोर दिया. अब पाकिस्तान मान चुका है कि चीनी हथियार सिर्फ दिखावे के लिए हैं, असल युद्ध में भरोसेमंद नहीं.
हालांकि पाकिस्तान की चीन से नजदीकी अमेरिका को रास नहीं आ रही. बीते वर्षों में पाकिस्तान ने चीन से रक्षा, इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा के क्षेत्र में गहरे संबंध बनाए हैं. लेकिन अब जब वह फिर से अमेरिका से हथियार की भीख मांगने पहुंचा है, तो अमेरिकी प्रशासन भी सतर्क है. अमेरिका इस बार पाकिस्तान को हथियार देने से पहले शर्तों और निगरानी पर जोर दे सकता है.
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