नमो 108, बुद्ध की पीतल की मूर्ति... भारत आए वियतनाम के राष्ट्रपति को पीएम मोदी ने दिए खास गिफ्ट

वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत का दौरा करते हुए पहले बिहार के बोधगया में अपने कार्यक्रम की शुरुआत की और फिर दिल्ली पहुंचे. उनकी इस यात्रा को भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है.

PM Narendra Modi special gift Vietnam President To Lam India visit
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वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने भारत का दौरा करते हुए पहले बिहार के बोधगया में अपने कार्यक्रम की शुरुआत की और फिर दिल्ली पहुंचे. उनकी इस यात्रा को भारत और वियतनाम के बीच बढ़ते रिश्तों का प्रतीक माना जा रहा है. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें विशेष रूप से चयनित गिफ्ट दिए, जिनमें भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की झलक मिलती है.

‘नमो 108’ कमल

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति तो लाम को कमल की एक अनोखी किस्म ‘नमो 108’ भेंट की. यह कमल उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित नेशनल बोटैनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किया गया है. इसमें ठीक 108 पंखुड़ियां होती हैं, जो हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म में पवित्र संख्या मानी जाती हैं. इस गिफ्ट में भारत की आधुनिक रिसर्च और पारंपरिक आध्यात्मिक महत्व दोनों की छाप दिखाई देती है.

बनारसी रेशमी कपड़ा

राष्ट्रपति तो लाम को बनारसी रेशमी कपड़ा भी भेंट किया गया. यह कपड़ा वाराणसी की ऐतिहासिक बुनाई कला का प्रतीक है, जो सदियों से अपनी उत्कृष्ट शाही ब्रोकेड और रेशमी कपड़े के लिए प्रसिद्ध रहा है. इसमें ‘टोन-ऑन-टोन’ जैक्वार्ड बुनाई के माध्यम से जुड़े फूल और बेलों के पैटर्न दिखाई देते हैं, जो भारतीय शिल्पकला की परंपरा को जीवंत करते हैं.

बुद्ध की पीतल की मूर्ति

इसके अलावा राष्ट्रपति तो लाम को बोधि वृक्ष के साथ बुद्ध की पीतल की मूर्ति भेंट की गई. इस मूर्ति में बुद्ध ध्यान की मुद्रा में बैठे हैं, उनके दाहिने हाथ को अभय मुद्रा में ऊपर उठाया गया है और बायां हाथ उनकी गोद में कटोरे के साथ रखा है. इसे उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के कारीगरों ने तैयार किया है, जो पीतल के बर्तनों और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है. यह मूर्ति भारत की प्राचीन ज्ञान और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है.

साझा विरासत और द्विपक्षीय रिश्तों का संदेश

राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा दोनों देशों की साझा सभ्यता और आध्यात्मिक परंपराओं को उजागर करती है. उन्होंने अपने राष्ट्रपति बनने के एक महीने के भीतर ही भारत का दौरा किया, जिससे यह साफ है कि भारत-वियतनाम संबंध उनके लिए उच्च प्राथमिकता रखते हैं. बोधगया से यात्रा की शुरुआत करना इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को और मजबूत बनाता है.

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