भारत के रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर रूस की तरफ से प्रतिक्रिया आई है. रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करेगा, यह बात सिर्फ ट्रंप कह रहे हैं. उनके अलावा किसी और देश या भारत की ओर से ऐसा कोई बयान नहीं आया है.
लावरोव के मुताबिक भारत और रूस के बीच तेल और अन्य क्षेत्रों में जो समझौते हुए हैं, वे सुरक्षित हैं और उन पर फिलहाल कोई खतरा नहीं है. दोनों देशों के रिश्ते पहले की तरह जारी रहेंगे.
ट्रंप ने क्या कहा था
पिछले हफ्ते ट्रंप ने भारत के साथ एक फ्रेमवर्क ट्रेड डील की घोषणा की थी. इसी दौरान उन्होंने दावा किया कि भारत ने रूस से कच्चा तेल न खरीदने पर सहमति जताई है. अमेरिका का आरोप है कि रूस तेल बेचकर जो कमाई करता है, उसका इस्तेमाल यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में किया जाता है.
भारत सरकार का पक्ष
भारत सरकार की ओर से भी इस मुद्दे पर स्थिति साफ की जा चुकी है. विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग देशों से कच्चा तेल खरीदेगा. सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए भारत कई देशों से तेल लेना जारी रखेगा.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतें सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं. उन्होंने साफ किया कि रूस के साथ भारत के सभी समझौते पहले की तरह जारी रहेंगे.
टैरिफ को लेकर पुराना विवाद
अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, क्योंकि भारत रूस से तेल खरीद रहा था. बाद में यह टैरिफ हटा लिया गया. हालांकि अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अगर भारत सीधे या परोक्ष रूप से रूसी तेल की खरीद फिर से बढ़ाता है, तो 25 प्रतिशत टैरिफ दोबारा लगाया जा सकता है.
लावरोव ने कहा कि अमेरिका भारत और ब्रिक्स देशों के साथ रूस के व्यापार, निवेश और सैन्य सहयोग को रोकने की कोशिश कर रहा है. उनके मुताबिक अमेरिका टैरिफ, प्रतिबंध और दबाव के जरिए दुनिया पर अपना असर बनाए रखना चाहता है. उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन के आने के बाद यह नीति और खुलकर सामने आई है.
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