Vande Mataram New Guidelines: सरकारी कार्यक्रमों में अब राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए नियम लागू कर दिए गए हैं. जैसे राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ बजाने और गाने के नियम तय हैं, वैसे ही अब ‘वंदे मातरम्’ को भी कई सरकारी आयोजनों में बजाना और गाना जरूरी होगा. गृह मंत्रालय के नए निर्देशों के मुताबिक, अगर दोनों एक साथ बजाए जाएं या गाए जाएं, तो पहले ‘वंदे मातरम्’ होगा और उसके बाद ‘जन गण मन’. इस दौरान मौजूद लोगों को सावधान मुद्रा में खड़ा रहना होगा.इसको लेकर सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और सरकारी संस्थानों को यह निर्देश भेज दिए हैं.
गृह मंत्रालय ने साफ किया है कि ‘वंदे मातरम्’ का पूरा 6 अंतरों वाला संस्करण, जिसकी अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड है, अब कई आधिकारिक मौकों पर बजाया या गाया जाएगा. इनमें झंडा फहराने के समय, राष्ट्रपति के किसी सरकारी कार्यक्रम में आने और जाने पर, उनके राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले और बाद में, साथ ही राज्यपाल या उपराज्यपाल के आगमन और भाषण के समय शामिल हैं.
The Union home ministry has mandated that a six-stanza-long, 3 minutes and 10 seconds version of Vande Mataram be played or sung at a raft of official occasions
— Raj Malhotra (@Rajmalhotrachd) February 11, 2026
including during the unfurling of the Tricolour, arrival of the President at events, before and after her speeches and… pic.twitter.com/Y4yyrBMolm
"खड़े होकर सम्मान दिखाना होगा"
मंत्रालय की ओर से 28 जनवरी को जारी किए गए आदेश में बताया गया है कि जब भी राष्ट्र गीत आधिकारिक रूप से बजाया या गाया जाए, तो श्रोताओं को खड़े होकर सम्मान दिखाना होगा. हालांकि, अगर किसी फिल्म, न्यूज रील या डॉक्यूमेंट्री में ‘वंदे मातरम्’ दिखाया जाए, तो दर्शकों से खड़े होने की उम्मीद नहीं होगी, ताकि कार्यक्रम में बाधा न पड़े और अव्यवस्था न फैले.
अब तक ‘वंदे मातरम्’ के लिए कोई तय प्रोटोकॉल नहीं था, जबकि ‘जन गण मन’ के लिए समय और तरीके से जुड़े नियम पहले से मौजूद थे. नए आदेश के बाद यह स्थिति बदल गई है. अब तय किया गया है कि राष्ट्र गीत किन-किन मौकों पर जरूरी तौर पर, किन मौकों पर गाना-बजाना अनिवार्य, और किन अवसरों पर इच्छा अनुसार गाया जा सकता है.
स्कूलों में इसे गाया जाएगा
राष्ट्रपति और राज्यपाल से जुड़े औपचारिक कार्यक्रमों, नागरिक सम्मान समारोहों और ध्वज परेड जैसे आयोजनों में ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा. कुछ कार्यक्रमों में इसके साथ सामूहिक गायन भी जरूरी होगा, जैसे झंडा फहराने के मौके पर या अन्य औपचारिक समारोहों में. स्कूलों में इसे गाया जा सकता है.
नई व्यवस्था में यह भी बताया गया है कि जब बैंड द्वारा ‘वंदे मातरम्’ बजाया जाएगा, तो उससे पहले ढोल की थाप दी जाएगी ताकि लोगों को पहले से संकेत मिल सके. मार्चिंग ड्रिल के दौरान यह थाप तय कदमों के अनुसार दी जाएगी और उसके बाद राष्ट्र गीत शुरू होगा.
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