संयुक्त राष्ट्र के मंच पर पाकिस्तान एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है. यूएन सुरक्षा परिषद की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए धमाके के पीछे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का हाथ था. रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा गया है कि जैश ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी.
संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति की रिपोर्ट में जैश को हाल के कई आतंकी हमलों से जोड़ा गया है. रिपोर्ट के मुताबिक जैश प्रमुख मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर को संगठन की एक नई महिला शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’ बनाने की घोषणा की थी. बताया गया है कि इस शाखा का मकसद आतंकी गतिविधियों में मदद और समर्थन जुटाना है.
UN में अलग-अलग बयान, पाकिस्तान पर सवाल
रिपोर्ट में एक सदस्य देश ने पुष्टि की है कि जैश ने कई हमलों की जिम्मेदारी खुद ली है, जिनमें लाल किले के पास हुआ धमाका भी शामिल है. वहीं एक दूसरे सदस्य देश ने जैश को “निष्क्रिय संगठन” बताया. जानकार मानते हैं कि इस तरह के विरोधाभासी बयानों से पाकिस्तान का दोहरा रवैया सामने आता है.
यूएन रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 28 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में शामिल तीन संदिग्ध आतंकवादी मारे गए थे.
पहलगाम हमला और भारत की कार्रवाई
हालांकि अप्रैल में पहलगाम में हुए हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, लेकिन रिपोर्ट में जैश से जुड़े लिंक को भी अलग से रेखांकित किया गया है.
पहलगाम हमले के बाद भारत ने सख्त कदम उठाए. मई महीने में भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की. इसके बाद चार दिनों तक सीमा पर तनावपूर्ण हालात बने रहे. इन हमलों में जैश और लश्कर के कई ठिकाने तबाह हुए और कई बड़े आतंकी मारे जाने की बात सामने आई. भारत ने इन कदमों को आत्मरक्षा बताते हुए दुनिया से आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने की अपील की थी.
जैश और लश्कर पहले से UN की पाबंदी सूची में
यूएन रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा को 1990 के दशक से अल-कायदा से रिश्तों के चलते संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध सूची में रखा गया है. इन संगठनों पर हथियार खरीद-बिक्री, यात्रा और फंडिंग पर रोक लगी हुई है. जैश सरगना मसूद अजहर को पहले ही वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा चुका है.
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