Rafale Deal: भारत की रक्षा ताकत में बड़ा इजाफा होने जा रहा है. रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसके साथ ही भारतीय नौसेना के लिए 6 अतिरिक्त P-8I समुद्री निगरानी विमान खरीदने को भी हरी झंडी मिल गई है. यह फैसला रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की भारत यात्रा से ठीक पहले यह निर्णय आया है, जिससे भारत-फ्रांस रिश्तों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है.
अब इस सौदे को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से अंतिम मंजूरी मिलनी बाकी है.
क्यों जरूरी थी यह डील?
भारतीय वायुसेना के पास इस समय सिर्फ 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. पुराने विमान धीरे-धीरे सेवा से बाहर हो रहे हैं. ऐसे में नए और आधुनिक लड़ाकू विमानों की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी.
राफेल विमान फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन से लिए जाएंगे. इनमें से 18 विमान सीधे तैयार हालत में आएंगे, जबकि 96 विमान भारत में बनाए जाएंगे. इससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा और देश में रोजगार के मौके बढ़ेंगे.
राफेल की ताकत क्या है?
राफेल एक मल्टी-रोल फाइटर जेट है. यानी यह हवा में दुश्मन से लड़ाई, जमीन पर हमले और समुद्र से जुड़े अभियानों तीनों में काम आ सकता है.
इन विमानों में आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वॉर सिस्टम और लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें लगाई जा सकती हैं. इससे भारत को चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों से मिलने वाली चुनौतियों का बेहतर जवाब देने में मदद मिलेगी. वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राफेल जैसे आधुनिक विमान मिलने से एयरफोर्स की ताकत कई गुना बढ़ेगी.
P-8I विमान क्यों अहम हैं?
भारतीय नौसेना के लिए मंजूर किए गए P-8I पोसाइडन विमान समुद्र में निगरानी के लिए बेहद अहम हैं. ये विमान दुश्मन की पनडुब्बियों, जहाजों और विमानों पर दूर से नजर रख सकते हैं. भारत के पास पहले से 12 ऐसे विमान हैं, अब 6 और जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी क्षमता और मजबूत होगी.
यह सौदा कितना बड़ा है?
यह सौदा सरकार से सरकार (G2G) के तहत किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी मानी जाती है. पहले भी 36 राफेल विमानों की खरीद इसी तरह हुई थी.
नई डील की कुल कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है. इसके बाद भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या बढ़कर करीब 35–36 तक पहुंचने की उम्मीद है.
डील की मुख्य बातें
भारतीय वायुसेना के पास पहले से 36 राफेल विमान दो स्क्वाड्रन में शामिल हैं. नई डील से वायुसेना की ताकत और बढ़ेगी. पिछले साल भारत और फ्रांस के बीच डसॉल्ट एविएशन और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स के बीच समझौते हुए थे, ताकि भविष्य में विमानों की डिलीवरी और निर्माण की प्रक्रिया तेज की जा सके.
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