अमेरिका के दबाव में नहीं झुकेगा भारत! पीयूष गोयल ने साफ किया रुख, बोले- शर्तें सही होंगी तभी होगी डील

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है.

India US Trade Deal Piyush Goyal says a deal will happen only if the terms are right
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

India-US Trade Deal: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते को तभी अंतिम रूप दिया जाएगा, जब भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर व्यापार शर्तें मिलेंगी.

गोयल ने कहा कि भारत के 9 मुक्त व्यापार समझौते ऐसे देशों के साथ हैं, जिनकी कुल अर्थव्यवस्था करीब 60 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर की है. इन समझौतों के जरिए भारत को दुनिया के करीब दो-तिहाई व्यापार तक बेहतर पहुंच मिल सकती है.

उन्होंने बताया कि भारत आने वाले महीनों और अगले दो-तीन साल में कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ, खाड़ी सहयोग परिषद और इजराइल के साथ भी व्यापार समझौते करने की दिशा में आगे बढ़ेगा.

न्यूजीलैंड से जल्द होगी डील

गोयल ने कहा कि न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौता जल्द लागू होने की उम्मीद है. इसके बाद यूरोपीय संघ के साथ भी व्यापार समझौता लागू किया जाएगा.

उन्होंने साफ कहा कि जब अमेरिका भारत के प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में भारतीय सामान को बेहतर शुल्क दर देने की स्थिति में होगा, तभी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा.

भारत और अमेरिका ने फरवरी में समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा तय करने की घोषणा की थी. हालांकि, अमेरिका की शुल्क नीति में बदलाव के कारण दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है.

अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत समेत कई देशों के सामान पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है. गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका जाएंगे. वह मिल्वॉकी में होने वाली जी-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ भी बातचीत करेंगे.

अमेरिकी बाजार में भारत के कई प्रतिद्वंद्वी

भारत के सामने अमेरिकी बाजार में श्रीलंका, बांग्लादेश, थाइलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश बड़े प्रतिस्पर्धी हैं. गोयल के मुताबिक, इन देशों के मुकाबले कम शुल्क मिलने से भारतीय सामान अमेरिकी बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है.

भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में अमेरिका को करीब 87 अरब अमेरिकी डॉलर का सामान निर्यात किया था.

एफटीए का ज्यादा फायदा उठाने पर जोर

गोयल ने मुक्त व्यापार समझौतों का फायदा देश के कारोबारियों तक पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर प्रयास करने की बात कही. उन्होंने कहा कि कारोबारियों, खासकर छोटे और मझोले उद्योगों को इन समझौतों से मिलने वाले अवसरों का पूरा फायदा उठाना चाहिए.

कार्यशाला में केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारियों के अलावा निर्यात संगठनों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि भी शामिल हुए. गोयल ने कहा कि सिर्फ शुल्क की दर देखना काफी नहीं है. यह भी देखना जरूरी है कि भारत के प्रतिस्पर्धी देशों को कितना शुल्क देना पड़ रहा है.

भारत की स्थिति पहले से बेहतर

गोयल ने कपड़ा उद्योग का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत को लंबे समय से बांग्लादेश और वियतनाम से मुकाबला करने में मुश्किल आती थी. बांग्लादेश को कम विकसित देश होने का फायदा मिलता था, जबकि वियतनाम के पास कई व्यापार समझौतों का लाभ था.

अब स्थिति बदल रही है और भारत को कई विकसित बाजारों में अपने प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर शुल्क दरें मिल रही हैं.

उन्होंने उद्योगों से बड़े स्तर पर उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और समय पर सामान पहुंचाने पर ध्यान देने को कहा. गोयल ने कहा कि अब जिम्मेदारी भारतीय उद्योग की है. भारत ने इस साल 1 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखा है. चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में निर्यात करीब 317 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 280 अरब डॉलर था.

100 नए औद्योगिक पार्क में निर्यातकों को प्राथमिकता

गोयल ने कहा कि वैश्विक व्यापार में आने वाली दिक्कतों के बीच छोटे निर्यातकों को हर संभव मदद दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि 2030 तक भारत को 2 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए.

उन्होंने बताया कि आने वाले 100 बड़े औद्योगिक पार्क में निर्यातकों को प्राथमिकता दी जाएगी. ज्यादा निवेश और उत्पादन का भरोसा देने वाली कंपनियों को आवंटन में भी राहत दी जा सकती है.

इन पार्कों में कारोबार शुरू करने के लिए सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और तैयार जगह जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर होगा.

समझौतों का फायदा उठाने के लिए कम समय

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यातकों को व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का जल्द फायदा उठाना चाहिए. उन्होंने कहा कि यह मौका हमेशा के लिए नहीं रहेगा.

भारत के प्रतिस्पर्धी देश भी आने वाले समय में ऐसे व्यापार समझौते कर सकते हैं. ऐसे में भारतीय कारोबारियों को अभी मिलने वाले लाभ का इस्तेमाल जल्द करना होगा.

भारत करीब 12,300 अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों में कारोबार करता है और इनमें से ज्यादातर किसी न किसी व्यापार समझौते के दायरे में आती हैं. अग्रवाल ने कहा कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे बाजारों में गुणवत्ता के मानक काफी ऊंचे हैं. इसलिए अगले 5 से 10 साल में नई आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने और इन समझौतों को वास्तविक कारोबार में बदलने पर ध्यान देना जरूरी है.

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