ISRO ने आधी रात रचा इतिहास, अंतरिक्ष में भेजा भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट, दुश्मनों की करेगा निगरानी

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात एक बड़ी कामयाबी हासिल की. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से उन्नत पृथ्वी निगरानी उपग्रह EOS-05 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया.

ISRO made history launching Indias first imaging satellite eos 05 success
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ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात एक बड़ी कामयाबी हासिल की. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से उन्नत पृथ्वी निगरानी उपग्रह EOS-05 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया. यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट के लिए तैयार किया गया भारत का पहला इमेजिंग सैटेलाइट है. इसे GSLV रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया. ISRO के मुताबिक, उड़ान भरने के करीब 18 मिनट बाद EOS-05 को तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया.

ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने मिशन की सफलता पर खुशी जताते हुए कहा कि GSLV-F17 रॉकेट ने एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 को बिल्कुल सही तरीके से उसकी तय कक्षा में पहुंचा दिया है.

उन्होंने कहा कि जब EOS-05 पूरी तरह काम करना शुरू करेगा, तब यह जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट से भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट होगा. इससे देश को महत्वपूर्ण रणनीतिक जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी.

कृषि और आपदा प्रबंधन में भी मिलेगी मदद

EOS-05 को पृथ्वी की निगरानी के लिए तैयार किया गया है. यह सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराएगा, जिनका इस्तेमाल कृषि, आपदा प्रबंधन और दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में किया जा सकेगा. जरूरत पड़ने पर इससे मिलने वाली जानकारी देश की सुरक्षा के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है.

GSLV-F17 रॉकेट इस उपग्रह को लेकर श्रीहरिकोटा से रवाना हुआ और इसे सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचाया गया.

36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर रहेगा सैटेलाइट

बुधवार रात करीब 11:30 बजे 27 घंटे की उलटी गिनती शुरू हुई थी. इसके बाद 2,367 किलोग्राम वजन वाले उपग्रह को लेकर रॉकेट ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से सुबह 2:55 बजे उड़ान भरी. देर रात का समय और बारिश भी लोगों का उत्साह कम नहीं कर सकी. बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक लॉन्च को देखने पहुंचे.

अधिकतर पृथ्वी निगरानी उपग्रह कम ऊंचाई वाली कक्षा यानी लो अर्थ ऑर्बिट में काम करते हैं. लेकिन EOS-05 पृथ्वी से करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहेगा. इस कक्षा में सैटेलाइट पृथ्वी की घूमने की गति के साथ तालमेल बनाए रखता है.

GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल की 19वीं उड़ान है.

रॉकेट का तीसरा चरण क्रायोजेनिक

GSLV-F17 रॉकेट की ऊंचाई 51.7 मीटर है और इसका वजन करीब 420.5 टन है. यह तीन चरणों वाला रॉकेट है, जिसका तीसरा चरण क्रायोजेनिक इंजन से चलता है. दो हजार किलोग्राम से ज्यादा वजन वाले सैटेलाइट को रॉकेट के ऊपरी हिस्से में लगाया गया था.

माना जा रहा है कि GSLV-F17/EOS-05 मिशन साल 2021 के असफल GSLV-F10/EOS-03 मिशन की जगह ले रहा है. उस मिशन में उड़ान के 307वें सेकंड पर ऑनबोर्ड कंप्यूटर ने प्रक्रिया रोक दी थी. बाद में उड़ान से मिले आंकड़ों की जांच में पता चला कि क्रायोजेनिक ऊपरी चरण में खराबी के कारण मिशन सफल नहीं हो पाया था.

करीब 8 महीने बाद ISRO का सफल लॉन्च

यह लॉन्च करीब 8 महीने के अंतराल के बाद हुआ है. इससे पहले इस साल 12 जनवरी को PSLV-C62 रॉकेट के जरिए 16 सैटेलाइट भेजे गए थे, लेकिन उड़ान के तीसरे चरण में आई गड़बड़ी के कारण रॉकेट उन्हें तय कक्षा में नहीं पहुंचा सका. यह इस साल ISRO का पहला और अब तक का एकमात्र असफल प्रक्षेपण था.

इससे पहले मई 2025 में PSLV-C61/EOS-09 मिशन भी सफल नहीं हो पाया था. उस दौरान मोटर में दबाव से जुड़ी समस्या सामने आई थी और मोटर के कक्ष में दबाव कम हो गया था.

मिशन से कुछ दिन पहले ISRO प्रमुख वी. नारायणन ने तिरुमाला तिरुपति स्थित भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर पहुंचकर पूजा की थी और मिशन की सफलता के लिए प्रार्थना की थी.