इस साल मौसम का बदलता मिजाज अब सिर्फ किसी एक देश की चिंता नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर वैश्विक स्तर पर दिखाई दे रहा है. संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो को लेकर बड़ा अलर्ट जारी किया है. WMO के मुताबिक अल नीनो मजबूती से स्थापित हो चुका है और आने वाले महीनों में यह बेहद शक्तिशाली रूप ले सकता है. इसके चलते दुनिया के कई हिस्सों में बारिश और तापमान के पैटर्न में बड़ा बदलाव आने के साथ बाढ़, सूखा और अत्यधिक गर्मी का खतरा बढ़ सकता है.
फरवरी 2027 तक बना रह सकता है अल नीनो
WMO के पूर्वानुमान के अनुसार, फरवरी 2027 तक अल नीनो के बने रहने की संभावना करीब 100 प्रतिशत है. प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म परिस्थितियां इसकी तीव्रता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही हैं. यदि यह घटना अत्यंत शक्तिशाली होती है तो इसका असर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में वर्षा और तापमान के स्वरूप पर पड़ सकता है. WMO के साथ राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एवं जल विज्ञान सेवाएं भी संभावित जोखिमों से निपटने और समय रहते चेतावनी जारी करने की तैयारियां तेज कर रही हैं.
भारत के लिए भी बढ़ी चिंता
अल नीनो का असर भारत के मौसम पर भी चिंता बढ़ा रहा है. 1 जून से 2 सितंबर 2026 के बीच देश में औसत से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. भारत मौसम विभाग के अनुसार, भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में फिलहाल मजबूत अल नीनो की स्थिति बनी हुई है और आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की उम्मीद है. इसका सीधा असर देश के मॉनसून और बारिश के वितरण पर पड़ सकता है.
सितंबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान
जून, जुलाई और अगस्त के बाद सितंबर में भी देशभर में बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है. मौसम विभाग की ताजा फोरकास्ट रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2026 में पूरे देश में मासिक वर्षा के सामान्य से कम यानी लॉन्ग पीरियड एवरेज के 91 प्रतिशत से नीचे रहने की सबसे अधिक संभावना है. भौगोलिक रूप से भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है. इसके साथ ही सितंबर में अधिकतर इलाकों में औसत अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना जताई गई है.
UP-बिहार में बारिश, नदियों का बढ़ा जलस्तर
हालांकि पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश हुई है. इसके चलते दोनों राज्यों की प्रमुख नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका को देखते हुए सेंट्रल वाटर कमीशन ने चेतावनी जारी की है. वहीं, भारत मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में बने लो प्रेशर एरिया के प्रभाव से 3 से 5 सितंबर के बीच मध्य प्रदेश में कई जगह भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. 3 सितंबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में कुछ स्थानों पर अत्यधिक भारी बारिश की भी संभावना है.
बारिश की कमी पूरी होने की उम्मीद
मध्य प्रदेश समेत कुछ राज्यों में होने वाली तेज बारिश से इस मॉनसून सीजन में बारिश की कमी की आंशिक भरपाई होने की उम्मीद है. हालांकि मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले एक सप्ताह के दौरान प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां धीमी रह सकती हैं. ऐसे में अल नीनो की बढ़ती ताकत और देश में बारिश के असमान वितरण के बीच आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी होगा.
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