S-400 से ब्रह्मोस तक... ऑपरेशन सिंदूर में PAK को कैसे दी मात? जानें राम मंदिर के नए CEO जितेंद्र मिश्र का रोल

Jitendra Mishra: ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने S-400, ब्रह्मोस और स्टैंड-ऑफ हथियारों के जरिए पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचाया, जिसमें एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की रणनीतिक भूमिका अहम रही.

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Jitendra Mishra: पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह पाकिस्तान और उसके आतंकी नेटवर्क के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की, उसने देश की बदलती युद्ध रणनीति की तस्वीर सामने रखी. मई 2025 में चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सशस्त्र बलों ने करीब 88 घंटे तक योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की. इस पूरे अभियान में भारतीय वायुसेना ने अहम भूमिका निभाई और पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन की कमान संभालने वालों में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र का नाम प्रमुख रहा.

पश्चिमी वायु कमान की संभाली कमान

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ने 1 जनवरी 2025 को भारतीय वायुसेना की पश्चिमी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला था. यह कमान रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके जिम्मे दिल्ली से लेकर सियाचिन, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा तक के महत्वपूर्ण हवाई क्षेत्र की सुरक्षा और सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी रहती है. पाकिस्तान सीमा से लगे इस मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए कई अहम फैसलों में पश्चिमी कमान की भूमिका रही.

3000 घंटे से ज्यादा उड़ान का अनुभव

एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र दिसंबर 1986 में फाइटर पायलट के तौर पर भारतीय वायुसेना में शामिल हुए थे. तीन दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने 3000 से अधिक घंटे उड़ान भरी और फाइटर कॉम्बैट लीडर तथा एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के रूप में भी सेवाएं दीं. कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर में मिराज-2000 से जुड़े अभियानों में भी उनका अनुभव अहम रहा. पश्चिमी वायु कमान की कमान संभालने से पहले वह इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (ऑपरेशंस) के पद पर तैनात थे.

ऑपरेशन सिंदूर में कैसे हुई कार्रवाई?

ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत 6-7 मई 2025 की रात हुई. पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मौजूद आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया. लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन से जुड़े ठिकानों पर सटीक हमले किए गए. मुरीदके, बहावलपुर और मुजफ्फराबाद समेत कई स्थानों पर आतंकी ढांचे को निशाना बनाया गया.

आतंकी ठिकानों के बाद सैन्य ठिकाने भी निशाने पर

पाकिस्तान की ओर से जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद भारत ने अपनी रणनीति को आगे बढ़ाया और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया. नूर खान और रहीम यार खान जैसे एयरबेस समेत अन्य महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर स्टैंड-ऑफ हथियारों के जरिए हमले किए गए. खास बात यह रही कि भारतीय विमानों ने अपनी हवाई सीमा से ही लंबी दूरी के हथियारों का इस्तेमाल किया, जिससे सीधे सीमा पार जाकर हमला करने का जोखिम कम हुआ.

S-400 ने बनाई पाकिस्तान के खिलाफ मजबूत ढाल

ऑपरेशन के दौरान भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. S-400 ने पाकिस्तानी विमानों को भारतीय क्षेत्र में आगे बढ़ने से रोकने में अहम योगदान दिया. अभियान के दौरान पाकिस्तान की ओर से भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों और एयर डिफेंस नेटवर्क को निशाना बनाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन भारतीय सुरक्षा तंत्र ने उन्हें नाकाम किया. एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के मुताबिक, एक कार्रवाई में S-400 सिस्टम ने 300 किलोमीटर से अधिक दूरी पर मौजूद लक्ष्य को निशाना बनाया.

पाकिस्तान की ‘आंखों’ पर किया गया वार

भारतीय रणनीति का एक अहम हिस्सा पाकिस्तान के रडार, AWACS और एयर डिफेंस नेटवर्क को कमजोर करना था. इससे पाकिस्तानी वायुसेना की निगरानी और जवाबी कार्रवाई की क्षमता प्रभावित हुई. भारतीय पक्ष ने स्टैंड-ऑफ हथियारों, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और इंटीग्रेटेड एयर कमांड सिस्टम के जरिए अभियान को समन्वित किया. लक्ष्य यह था कि दुश्मन की सैन्य क्षमता को नुकसान पहुंचे, लेकिन कार्रवाई को नियंत्रित रखा जाए.

कौन-कौन से हथियार बने ऑपरेशन का हिस्सा?

ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सैन्य क्षमता के कई आधुनिक सिस्टम का इस्तेमाल किया गया. इनमें S-400 एयर डिफेंस सिस्टम, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, राफेल लड़ाकू विमानों से दागी जाने वाली SCALP-EG क्रूज मिसाइल और HAMMER गाइडेड बम शामिल रहे. इसके अलावा सुखोई-30MKI, मिग-29 और मिराज-2000 जैसे फाइटर जेट, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम तथा विभिन्न ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन भी अभियान की क्षमता का हिस्सा रहे.

रणनीति में सटीकता और नियंत्रित जवाब पर जोर

ऑपरेशन सिंदूर की रणनीति का मूल आधार सटीक हमला, कम जोखिम और नियंत्रित सैन्य प्रतिक्रिया रहा. खुफिया जानकारी के आधार पर पहले से लक्ष्यों की पहचान की गई और स्टैंड-ऑफ रेंज से हमला किया गया. नागरिक क्षेत्रों से दूरी बनाए रखने और अनावश्यक नुकसान से बचने पर विशेष ध्यान दिया गया. जरूरत के मुताबिक कार्रवाई को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया, जिसे कैलिब्रेटेड एस्केलेशन की रणनीति के तौर पर देखा गया.

सेवा के लिए मिला सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र को उनकी सेवाओं के लिए सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल (SYSM) से सम्मानित किया गया. अप्रैल 2026 में वह भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए. उनके नेतृत्व में पश्चिमी वायु कमान की भूमिका ने यह दिखाया कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ सीमा पार जाकर लड़ना ही जरूरी नहीं, बल्कि लंबी दूरी के सटीक हथियारों, मजबूत एयर डिफेंस और बेहतर खुफिया समन्वय के जरिए भी रणनीतिक लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं.

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