रूस से तेल खरीदता रहेगा भारत? जयशंकर ने यूक्रेन की धरती से दे दिया जवाब, बताया कैसे खत्म होगी जंग

भारत रूस से तेल क्यों खरीदता है? यह सवाल अमेरिका से लेकर यूरोप तक लगातार उठता रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर कई बार दबाव बना चुके हैं. लेकिन भारत अपने फैसले पर कायम है.

Will India continue to buy oil from Russia Jaishankar answers from Ukraine
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

भारत रूस से तेल क्यों खरीदता है? यह सवाल अमेरिका से लेकर यूरोप तक लगातार उठता रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर कई बार दबाव बना चुके हैं. लेकिन भारत अपने फैसले पर कायम है. अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता.

रूस से तेल खरीदने पर क्या बोले जयशंकर?

रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को करीब पांच साल होने वाले हैं. इसी बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे. यहां उन्होंने भारत का रुख दोहराते हुए कहा कि अब इस लंबे युद्ध को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि यह युद्ध का दौर नहीं है और हर समस्या का समाधान बातचीत के जरिए होना चाहिए.

मीडिया से बातचीत के दौरान एक यूक्रेनी पत्रकार ने जयशंकर से पूछा कि अगर अमेरिका रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा देता है, तो क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा?

जयशंकर ने शांत अंदाज में जवाब देते हुए कहा कि दुनिया को यह समझना होगा कि 140 करोड़ लोगों वाले देश को ईंधन उपलब्ध कराना कितनी बड़ी जिम्मेदारी है. भारत अपनी जनता की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकता और किसी दबाव में अपनी नीति नहीं बदलेगा.

उन्होंने कहा कि यूक्रेन का इस युद्ध को लेकर अपना नजरिया है और भारत उसका सम्मान करता है. साथ ही भारत चाहता है कि दुनिया और यूक्रेन भी भारत की स्थिति और उसकी जरूरतों को समझें.

तेल खरीदने से युद्ध नहीं रुकेगा

जयशंकर ने कहा कि रूस से तेल, धातु, खनिज या खाद खरीदने से किसी देश का फैसला इस युद्ध को खत्म नहीं कर सकता. उनके मुताबिक अगर कोई यह मानता है कि व्यापार रोककर या आर्थिक पाबंदियां लगाकर युद्ध खत्म किया जा सकता है, तो यह सही सोच नहीं है.

उन्होंने कहा कि इस युद्ध का समाधान मैदान में नहीं निकलेगा. इसे बातचीत, कूटनीति और दोनों पक्षों के बीच संवाद से ही खत्म किया जा सकता है. भारत शुरू से इसी बात पर जोर देता रहा है. जयशंकर ने कहा कि शांति की कोशिशों में भारत की कोई भूमिका बनती है तो वह मदद के लिए तैयार है.

जेलेंस्की ने भारत का जताया आभार

जयशंकर का यूक्रेन दौरा ऐसे समय हुआ जब वहां सुरक्षा का माहौल बेहद तनावपूर्ण था. कीव में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान रूस की तरफ से ड्रोन हमला भी हुआ. यूक्रेनी वायुसेना ने ज्यादातर ड्रोन को मार गिराया, जिससे भारतीय प्रतिनिधिमंडल सुरक्षित रहा.

इसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भारत के शांति प्रयासों की तारीफ की. जयशंकर से मुलाकात के बाद उन्होंने कहा कि वह युद्ध खत्म करने के लिए भारत की कोशिशों के आभारी हैं. जेलेंस्की ने भी कहा कि यह समय युद्ध का नहीं, बल्कि शांति का होना चाहिए.

ब्लैक सी और विकासशील देशों की चिंता

बैठक के दौरान यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा ने ब्लैक सी में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि बंदरगाहों पर हमलों की वजह से अनाज का निर्यात प्रभावित हो रहा है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में खाद्य संकट पैदा हो सकता है.

जयशंकर ने भी इस चिंता से सहमति जताई. उन्होंने कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमलों का असर भारतीय नाविकों पर भी पड़ा है. ईंधन, खाद और खाद्यान्न की सप्लाई प्रभावित होने से विकासशील और गरीब देशों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है. भारत लगातार इन देशों की समस्याओं को सामने उठाता रहा है.

रूस से रिश्ते, यूक्रेन की भी मदद

रूस के साथ मजबूत संबंध होने के बावजूद भारत ने यूक्रेन को मानवीय मदद देना जारी रखा है. जयशंकर ने बताया कि भारत अब तक यूक्रेन को दवाइयां, मेडिकल सामान और बिजली के जनरेटर समेत मानवीय सहायता की 19 खेप भेज चुका है.

भारत का यह रुख दिखाता है कि वह रूस के साथ अपने पुराने संबंधों को बनाए रखने के साथ यूक्रेन के साथ भी बातचीत जारी रखे हुए है. भारत किसी एक गुट के साथ खड़े होने के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों और शांति के लिए संतुलित नीति पर आगे बढ़ रहा है.

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