चीन ने वैश्विक सैन्य ताकत बनने की होड़ में जबरदस्त छलांग लगाई है, लेकिन इस छलांग के पीछे की हकीकत कुछ और ही है. चीन की प्रगति सिर्फ इनोवेशन की कहानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर तकनीकी नकल और रिवर्स इंजीनियरिंग की रणनीति भी इसमें शामिल है — और सबसे ज्यादा नुकसान इस दौड़ में रूस और अमेरिका जैसे देशों को उठाना पड़ा है.
रूस-चीन की दोस्ती में धोखे की दरार
एक वक्त था जब चीन रूस से हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार था. चीन की 85% से ज्यादा मिलिट्री आयात जरूरतें रूस से पूरी होती थीं. लेकिन आज हालात बदले हैं. चीन ने रूस से मिली तकनीकों को न सिर्फ अपने यहां तैयार किया, बल्कि हूबहू कॉपी कर खुद को आत्मनिर्भर भी बना लिया.
सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस जब आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, तब उसने अपने लड़ाकू विमान सुखोई-27 चीन को बेचे. चीन ने शुरुआत में दो दर्जन सुखोई खरीदे और रूस पर कुछ हिस्से चीन में बनाने का दबाव डाला. लेकिन कुछ ही सालों में सौदा रद्द कर दिया गया. फिर जल्द ही उसी सुखोई-27 की तरह दिखने वाला J-11B फाइटर जेट चीन ने तैयार कर लिया.
जहां रूस ने मदद की, चीन ने रिवर्स इंजीनियरिंग कर दी चोरी
रूस के अत्याधुनिक SU-33 की तकनीक को भी चीन ने यूक्रेन से खरीदे प्रोटोटाइप के जरिए दोहराया और J-15 ‘फ्लाइंग शार्क’ को बनाया — जो अब उसका एयरक्राफ्ट कैरियर बेस्ड चौथी पीढ़ी का मल्टी-रोल फाइटर है.
रूसी डिफेंस कंपनियों की मानें तो साल 2002 से 2019 के बीच चीन द्वारा 500 से ज्यादा रूसी मिलिट्री उपकरणों की नकल की गई. इनमें फाइटर जेट्स, एयर डिफेंस सिस्टम, इंजन और मिसाइलें शामिल हैं. रूस का S-300 सिस्टम खरीदकर चीन ने HQ-9 और HQ-15 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम तैयार कर लिए, जिनकी प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं. वहीं रूस का S-400 सिस्टम आज भी काफी भरोसेमंद माना जाता है.
क्लोनिंग का कारोबार – लंबी फेहरिस्त
रूस के पुराने ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट AN-12 की जगह चीन ने Y-9 बनाया. Msta-S हॉवित्जर की तर्ज पर PLZ-05 तैयार हुआ. BM-30 स्मर्च के मॉडल से PHL-03 मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर बना. BMP-1 की नकल WZ-501 नाम से चीनी सेना में शामिल हुई.
ये सिलसिला यहीं नहीं रुका. चीन ने अमेरिकी तकनीकों पर भी जमकर हाथ साफ किया. 2011 में एबटाबाद में ओसामा बिन लादेन के खिलाफ ऑपरेशन के दौरान क्रैश हुआ अमेरिका का ब्लैक हॉक हेलिकॉप्टर चीन के हाथ लग गया. दो साल के अंदर चीन ने Z-20 हेलिकॉप्टर उड़ाकर दिखा दिया कि रिवर्स इंजीनियरिंग में उसकी महारत अब किसी से छिपी नहीं.
अमेरिका के हाई-टेक हथियारों की भी नकल
F-35 फाइटर जेट के डिजाइन पर आधारित FC-31 (J-35), F-16 से प्रेरित J-10, अमेरिकी UCAV X-47B की कॉपी CH-7, MQ-9 प्रीडेटर का चीनी वर्जन विंग लूंग और CH-4/5/6 जैसे ड्रोन — ये सभी चीन की रिवर्स इंजीनियरिंग की उपलब्धियों में शामिल हैं. इतना ही नहीं, अमेरिका के C-17 ग्लोबमास्टर III का क्लोन Y-20 और AEW&CS सिस्टम E-2 हॉकआई का क्लोन KJ-600 भी अब चीनी सेना के बेड़े का हिस्सा हैं.
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