साबुन, कपड़े से लेकर खाने तक... मिडिल ईस्ट जंग से भारत में बढ़ेगी महंगाई, किन चीजों पर होगा असर?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है.

Israel US Iran Middle East war will increase inflation in India effect
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर आने वाले समय में भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है. अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और एलपीजी की सप्लाई सीमित होती है, तो रोजमर्रा के कई सामान महंगे हो सकते हैं.

रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनियों की उत्पादन लागत पहले ही बढ़ने लगी है. हालांकि कई कंपनियां तुरंत कीमतें बढ़ाने से बच रही हैं क्योंकि उन्हें डर है कि ग्राहक अचानक बढ़ी कीमतों को स्वीकार नहीं कर पाएंगे.

जानकारी के मुताबिक ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़रायल से जुड़े संघर्ष को करीब 15 दिन हो चुके हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी रहती है, तो आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है. इसका असर कई उद्योगों और रोजमर्रा की चीजों पर दिखाई दे सकता है.

पेंट

पेंट बनाने में कच्चे तेल से बने रसायनों का बड़ा उपयोग होता है. उद्योग के अनुसार पेंट की लागत का लगभग 60% हिस्सा तेल से जुड़े उत्पादों पर निर्भर करता है. अगर कच्चा तेल महंगा रहता है, तो अप्रैल से पेंट की कीमतों में 2% से 5% तक बढ़ोतरी हो सकती है.

खाने का तेल

भारत अपनी जरूरत का लगभग दो-तिहाई खाने का तेल आयात करता है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय सप्लाई में किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे कीमतों पर पड़ सकता है. अगर समुद्री रास्तों, जैसे लाल सागर या स्वेज नहर में रुकावट आती है, तो सप्लाई में देरी और लॉजिस्टिक लागत बढ़ सकती है.

सिंथेटिक कपड़ा

सिंथेटिक कपड़े बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल पेट्रोकेमिकल्स से तैयार होते हैं, जो कच्चे तेल से बनते हैं. इस उद्योग की लगभग 70–80% लागत तेल की कीमतों से जुड़ी होती है. ऐसे में तेल महंगा होने पर स्पोर्ट्स जर्सी, योगा पैंट, कारपेट और इंडस्ट्रियल फैब्रिक जैसे उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं.

पैकेज्ड फूड

पाम ऑयल की कीमतों में हाल के दिनों में करीब 4% तक बढ़ोतरी देखी गई है. इसका असर पैकेज्ड फूड कंपनियों पर पड़ सकता है. नमकीन बनाने वाली कंपनियों की लागत का लगभग 15–25% हिस्सा पाम ऑयल से जुड़ा होता है, जबकि बिस्किट कंपनियों की लागत में इसका हिस्सा लगभग 45% तक होता है.

हवाई किराया

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के कारण विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतें भी बढ़ी हैं. इसी वजह से एयर इंडिया, एयर इंडिया एक्सप्रेस और इंडिगो ने कुछ घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल सरचार्ज बढ़ाने का फैसला किया है.

पर्सनल केयर प्रोडक्ट्स

साबुन, शैंपू और डिटर्जेंट जैसे उत्पादों के निर्माण में भी कच्चे तेल से बने रसायनों का इस्तेमाल होता है. इनकी कच्चे माल की लागत का करीब 30–40% हिस्सा तेल से जुड़ा होता है. इसके अलावा पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक जैसे एचडीपीई और पीईटी भी पेट्रोलियम से बनते हैं, इसलिए तेल महंगा होने पर इनकी कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

ऑटोमोबाइल सेक्टर

अगर युद्ध लंबा चलता है तो ऑटोमोबाइल उद्योग पर भी असर पड़ सकता है. टायर बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल जैसे सिंथेटिक रबर, कार्बन ब्लैक और प्रोसेसिंग ऑयल कच्चे तेल से बनते हैं. टायर उद्योग की कुल कच्चे माल की लागत का लगभग 60–70% हिस्सा तेल से जुड़ा होता है. उद्योग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कुछ कंपनियां टायर की कीमतों में 1.5% से 2% तक बढ़ोतरी कर सकती हैं, जबकि कुछ खास टायरों की कीमतें 3% से 8% तक बढ़ सकती हैं.

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