ईरान जंग के बीच सरकार का बड़ा कदम, होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत आएंगे 8 LPG टैंकर! नहीं होगी गैस की कमी

मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर भारत में भी महसूस किया जा रहा है. कई जगह रसोई गैस सिलिंडर को लेकर अफरा-तफरी की खबरें सामने आई हैं और लोगों में गैस की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है.

Iran War 8 LPG tankers will cross the Strait of Hormuz and come to India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Strait of Hormuz: मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर भारत में भी महसूस किया जा रहा है. कई जगह रसोई गैस सिलिंडर को लेकर अफरा-तफरी की खबरें सामने आई हैं और लोगों में गैस की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है. हालांकि सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी की आपूर्ति बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और घबराने की जरूरत नहीं है.

आठ एलपीजी टैंकर भारत आने की तैयारी में

सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ईरान के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि एलपीजी से भरे टैंकर सुरक्षित तरीके से भारत पहुंच सकें. जानकारी के अनुसार आठ एलपीजी टैंकर इस समय होर्मुज जलडमरूमध्य के पास खड़े हैं और उन्हें जल्द ही आगे बढ़ने की अनुमति मिल सकती है.

अधिकारियों का कहना है कि इस मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, लेकिन बातचीत के जरिए इसे सुचारु बनाने की कोशिश की जा रही है. उम्मीद जताई जा रही है कि ये टैंकर जल्द ही भारत पहुंच जाएंगे, जिससे गैस आपूर्ति को मजबूती मिलेगी.

ईरान से बातचीत जारी

सूत्रों के अनुसार भारत और ईरान के बीच इस मुद्दे पर लगातार बातचीत हो रही है. बताया जा रहा है कि ईरान इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहा है. इसके साथ ही लगभग 250 ईरानी नाविक इस समय भारत में हैं, जो अपने देश लौटने का इंतजार कर रहे हैं. भारतीय अधिकारियों ने उनके रहने की व्यवस्था की है और उनकी वापसी की प्रक्रिया भी जारी है.

संकट से निपटने के लिए सरकार सक्रिय

एलपीजी और तेल आपूर्ति में किसी भी तरह की कमी से बचने के लिए सरकार का संकट प्रबंधन समूह लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है. यह समूह ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े सभी विभागों के साथ समन्वय बनाकर काम कर रहा है, ताकि देश में रसोई गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो.

एलपीजी आयात पर भारत की निर्भरता

भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात करता है. इसका बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों से आता है और इनका अधिकांश परिवहन होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होता है. इसलिए इस मार्ग में किसी भी तरह की रुकावट का असर गैस की आपूर्ति पर पड़ सकता है.

सुरक्षित मार्ग के लिए कूटनीतिक कोशिशें

भारत अपने गैस टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर भी प्रयास कर रहा है. इसी सिलसिले में विदेश मंत्री एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई बार बातचीत हो चुकी है.

इसके अलावा जरूरत पड़ने पर भारतीय नौसेना की सुरक्षा में ईंधन टैंकरों को सुरक्षित लाने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है. सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में गैस और ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनी रहे.

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