नई दिल्ली: एशिया के कई देशों में मौसम संबंधी चुनौतियों का असर चावल उत्पादन और कीमतों पर दिखाई देने लगा है. संभावित अल नीनो की आशंकाओं के बीच वियतनाम में चावल की निर्यात कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि बांग्लादेश में गर्मी और मौसम से जुड़ी घटनाओं ने फसल उत्पादन को प्रभावित किया है. दूसरी ओर, भारत में पर्याप्त भंडार और मजबूत आपूर्ति व्यवस्था के कारण चावल की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं.
वियतनाम में निर्यात कीमतों में उछाल
वियतनाम के 5 प्रतिशत ब्रोकन राइस की निर्यात कीमत इस सप्ताह बढ़कर 415 से 420 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई. पिछले सप्ताह यह कीमत 405 से 410 डॉलर प्रति टन के बीच थी.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई महीने में वियतनाम ने करीब 9.25 लाख टन चावल का निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 19 प्रतिशत अधिक है. वहीं, जनवरी से मई तक कुल निर्यात 43 लाख टन तक पहुंच गया, जो सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
अल नीनो को लेकर बाजार में चिंता
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले महीनों में अल नीनो के विकसित होने की संभावना काफी अधिक है. इसके चलते एशिया के प्रमुख कृषि उत्पादक देशों में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है.
व्यापार से जुड़े जानकारों का मानना है कि संभावित उत्पादन जोखिमों को देखते हुए बाजार में पहले से ही कीमतों पर दबाव दिखाई दे रहा है. वियतनाम जैसे देशों में मौसम संबंधी अनिश्चितताओं को लेकर व्यापारी और निर्यातक सतर्क नजर आ रहे हैं.
बांग्लादेश में गर्मी और बारिश का दोहरा असर
बांग्लादेश में जारी गर्म मौसम ने धान की कटाई प्रक्रिया को प्रभावित किया है. किसानों का कहना है कि अधिक तापमान के कारण फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ रहा है.
इसके अलावा, प्री-मानसून बारिश के चलते दो लाख टन से अधिक चावल की फसल को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है. इससे स्थानीय बाजार में आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं और कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.
भारत में बनी हुई है स्थिरता
भारत में चावल की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला है. 5 प्रतिशत ब्रोकन परबॉयल्ड राइस की कीमत 337 से 345 डॉलर प्रति टन के दायरे में बनी हुई है, जबकि 5 प्रतिशत ब्रोकन व्हाइट राइस का भाव 338 से 344 डॉलर प्रति टन के बीच रहा.
निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, जिससे घरेलू और निर्यात बाजार दोनों में आपूर्ति संतुलित बनी हुई है. यही कारण है कि अन्य देशों की तुलना में भारतीय बाजार में कीमतों पर दबाव कम दिखाई दे रहा है.
थाईलैंड में भी कीमतों को मिला सहारा
थाईलैंड में 5 प्रतिशत ब्रोकन चावल की कीमत करीब 450 डॉलर प्रति टन बनी हुई है. व्यापारियों के अनुसार, पशु आहार में उपयोग होने वाले टूटे चावल की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च में इजाफा हुआ है, जिसका असर बाजार कीमतों पर भी पड़ा है.
हालांकि, पूरे क्षेत्र की नजर अब आगामी फसल पर टिकी हुई है. अगले कुछ महीनों में नई फसल की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि अल नीनो का वास्तविक प्रभाव उत्पादन और वैश्विक चावल बाजार पर कितना पड़ता है.
भारत के लिए क्या मायने?
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल भारत की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. पर्याप्त भंडार और स्थिर आपूर्ति व्यवस्था के कारण देश में कीमतों पर तत्काल दबाव नहीं है. हालांकि यदि अल नीनो का असर व्यापक स्तर पर उत्पादन पर पड़ता है, तो भविष्य में वैश्विक बाजार की परिस्थितियां बदल सकती हैं.
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