'पद नहीं, देश और युवाओं का हित सबसे पहले...' धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह ने दी पहली प्रतिक्रिया

Dharmendra Pradhan Resignation: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अमित शाह का बड़ा बयान, बोले- पद नहीं, देश और युवाओं का हित सबसे ऊपर

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Dharmendra Pradhan Resignation: NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है. इस फैसले के बाद केंद्र सरकार की ओर से पहली बड़ी प्रतिक्रिया केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की आई. उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए किसी भी पद से अधिक महत्वपूर्ण देश, युवाओं का भविष्य और विद्यार्थियों का विश्वास है. अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार की जवाबदेही और युवाओं के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार और पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है.

अमित शाह बोले- देश और विद्यार्थियों का हित सर्वोपरि

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि बीजेपी हमेशा राष्ट्रहित और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता देती है. उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का प्रमाण है कि सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करती है और यदि किसी मुद्दे पर युवाओं का भरोसा प्रभावित होता है तो उसे गंभीरता से लिया जाता है. उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से परीक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और मेहनत से सफल होने वाले विद्यार्थियों को न्याय मिलेगा.

धर्मेंद्र प्रधान ने भावुक होकर दिया इस्तीफा

25 जुलाई को अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बेहद आहत किया है. उन्होंने कहा कि यह मामला केवल उनके पद या राजनीतिक प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों छात्रों के विश्वास से जुड़ा हुआ है. उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए लगातार काम करती रहेगी.

शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का किया उल्लेख

अमित शाह ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने, मातृभाषाओं में परीक्षाओं की सुविधा बढ़ाने, पीएम श्री विद्यालयों के विस्तार, डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करने जैसे कई महत्वपूर्ण कदम उनके कार्यकाल में उठाए गए. उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में किए गए प्रयासों की भी सराहना की.

प्रह्लाद जोशी को मिली शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर उनका इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया. इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. वह अपने मौजूदा मंत्रालय, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले, के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी भी संभालेंगे. सरकार का मानना है कि मंत्रालय के कामकाज में किसी तरह की रुकावट न आए और सुधारों की प्रक्रिया लगातार जारी रहे.

छात्रों ने इस्तीफे को आंदोलन की पहली बड़ी जीत बताया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं में उत्साह का माहौल देखने को मिला. प्रदर्शनकारियों ने इसे अपने लंबे आंदोलन की पहली महत्वपूर्ण सफलता बताया. उनका कहना है कि यह केवल एक मंत्री के इस्तीफे का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की शुरुआत है. छात्रों ने साफ किया कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं बनाया जाता.

शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बढ़ी उम्मीद

NEET पेपर लीक विवाद के बाद हुए इस घटनाक्रम ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को और तेज कर दिया है. सरकार जहां परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिला रही है, वहीं छात्र संगठन पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षित परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग पर कायम हैं. आने वाले दिनों में शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर लिए जाने वाले फैसलों पर पूरे देश की नजर रहेगी.

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