Rafale Vs Su-35: आमने-सामने आए फ्रांस और रूस के सबसे ताकतवर फाइटर जेट्स, कौन पड़ा भारी? देखें Video

बाल्टिक सागर के ऊपर फ्रांस और रूस के लड़ाकू विमानों के बीच हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल इंटरसेप्शन देखने को मिला.

Rafale Vs Su-35 French Rafale Intercept Russian Sukhoi Su 35 Fighter Jet Video
प्रतिकात्मक तस्वीर/ AI

Rafale Vs Su-35: बाल्टिक सागर के ऊपर फ्रांस और रूस के लड़ाकू विमानों के बीच हाल ही में एक हाई-प्रोफाइल इंटरसेप्शन देखने को मिला. नाटो के बाल्टिक एयर पुलिसिंग मिशन के तहत तैनात फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों ने रूसी सैन्य विमानों के एक समूह की निगरानी और पहचान की, जिसमें रूस का अत्याधुनिक Su-35 फाइटर जेट भी शामिल था.

जानकारी के अनुसार, लिथुआनिया के सियाउलियाई एयर बेस से उड़ान भरने वाले दो फ्रांसीसी राफेल विमानों ने सहयोगी देशों के ग्रिपेन लड़ाकू विमानों के साथ मिलकर रूसी विमानों के समूह को इंटरसेप्ट किया. यह घटना सप्ताह की शुरुआत में बाल्टिक क्षेत्र में हुई.

फ्रांस ने जारी किया वीडियो

फ्रांस के संयुक्त सैन्य मुख्यालय ने इस ऑपरेशन का वीडियो सार्वजनिक किया है. फ्रांसीसी अधिकारियों के मुताबिक, मिशन के दौरान पायलटों ने स्थिति पर करीबी नजर रखी और बिना किसी तनाव को बढ़ाए अपने दायित्वों का निर्वहन किया.

फ्रांसीसी सेना का कहना है कि नाटो के बाल्टिक एयर पुलिसिंग मिशन के तहत राफेल विमान नियमित रूप से सहयोगी देशों के साथ मिलकर क्षेत्रीय हवाई सुरक्षा और निगरानी का कार्य करते हैं.

रूसी विमानों के समूह में शामिल था Su-35

रिपोर्टों के अनुसार, रूसी विमान समूह में एक Su-35 फाइटर जेट के अलावा An-12 और An-30 टोही विमान, Su-24 और Su-34 स्ट्राइक फाइटर तथा Il-76 सैन्य परिवहन विमान शामिल थे.

इन विमानों में Su-35 को सबसे उन्नत एयर-सुपीरियरिटी फाइटर माना जाता है. इसका मुख्य कार्य अन्य विमानों को सुरक्षा प्रदान करना और हवाई खतरों से निपटना होता है. इसी कारण वह पूरे रूसी समूह के साथ एस्कॉर्ट भूमिका में मौजूद था.

बढ़ रही हैं रूस-नाटो हवाई गतिविधियां

पिछले कुछ वर्षों में बाल्टिक सागर के ऊपर नाटो और रूसी सैन्य विमानों के बीच इस तरह की गतिविधियां लगातार बढ़ी हैं. रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस क्षेत्र में दोनों पक्ष नियमित रूप से निगरानी और सैन्य मिशन संचालित करते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मिशनों के जरिए एक-दूसरे की प्रतिक्रिया क्षमता, निगरानी प्रणाली और परिचालन रणनीतियों का आकलन किया जाता है. इसी वजह से बाल्टिक क्षेत्र यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

राफेल और Su-35 की तुलना

इस घटना के बाद फ्रांस के राफेल और रूस के Su-35 लड़ाकू विमानों की क्षमताओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है. दोनों विमान 4.5 पीढ़ी (4.5 Generation) के आधुनिक लड़ाकू विमान माने जाते हैं, लेकिन उनकी डिजाइन और संचालन की अवधारणा अलग-अलग है.

Su-35 की विशेषताएं

रूस का Su-35 एक बड़े आकार का एयर-सुपीरियरिटी फाइटर है, जिसे Su-27 प्लेटफॉर्म के उन्नत संस्करण के रूप में विकसित किया गया है. इसकी ताकत लंबी दूरी, उच्च गति और हवाई युद्ध क्षमता मानी जाती है.

राफेल की खासियत

दूसरी ओर, फ्रांस का राफेल एक बहुउद्देश्यीय (Omnirole) लड़ाकू विमान है, जिसे विभिन्न प्रकार के मिशनों के लिए तैयार किया गया है. इसमें उन्नत सेंसर फ्यूजन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और आधुनिक एवियोनिक्स का उपयोग किया गया है.

किसे माना जाता है अधिक प्रभावी?

दोनों विमान परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता रखते हैं और दोनों ही स्टेल्थ श्रेणी में नहीं आते. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार राफेल को उसके अपेक्षाकृत छोटे आकार, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा प्रणाली, रडार जैमिंग क्षमताओं और विशेष कंपोजिट सामग्री के उपयोग के कारण कुछ परिचालन परिस्थितियों में बढ़त मिल सकती है.

वहीं Su-35 अपनी शक्ति, गति और हवाई युद्ध क्षमता के लिए जाना जाता है. ऐसे में किसी वास्तविक मुकाबले में कौन अधिक प्रभावी साबित होगा, यह परिस्थितियों, पायलट कौशल और मिशन प्रोफाइल पर निर्भर करेगा.

फिलहाल बाल्टिक सागर में हुई यह घटना किसी सैन्य टकराव में नहीं बदली, लेकिन इसने एक बार फिर यूरोप के संवेदनशील हवाई क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और आधुनिक लड़ाकू विमानों की क्षमताओं पर चर्चा को तेज कर दिया है.

ये भी पढ़ें- अमेरिका के ओहायो में फेस्टिवल के दौरान फायरिंग, कई लोग घायल; हमलावरों की तलाश में जुटी पुलिस