US-Iran Tension: मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच भले ही युद्धविराम लागू है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है. दोनों देश इस सीजफायर के दौरान अपनी सैन्य तैयारियों को मजबूत करने में जुटे हुए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और जटिल होता नजर आ रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने संभावित हमलों के खतरे को देखते हुए अपने एयर डिफेंस सिस्टम को गुप्त तरीके से शिफ्ट किया है. जॉर्डन में THAAD और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम की तैनाती में बदलाव किया गया है.
सैटेलाइट तस्वीरों से इस रणनीतिक बदलाव का संकेत मिला है, जिससे यह साफ है कि अमेरिका किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार रहना चाहता है.
ईरान ने अंडरग्राउंड ठिकानों से निकाले हथियार
दूसरी ओर ईरान ने भी अपनी सैन्य गतिविधियां तेज कर दी हैं. बताया जा रहा है कि उसने अपने भूमिगत “मिसाइल सिटी” से हथियारों को बाहर निकालना शुरू कर दिया है.
कई हफ्तों तक चले संघर्ष के बावजूद ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता का बड़ा हिस्सा सुरक्षित रखा है और अब वह उसे फिर से सक्रिय करने में जुटा हुआ है.
अभी भी मजबूत है ईरान की सैन्य क्षमता
अमेरिकी सैन्य और खुफिया एजेंसियों के आकलन के अनुसार:
यह आंकड़े बताते हैं कि भारी नुकसान के बावजूद ईरान की युद्ध क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है.
होर्मुज पर असर डालने की क्षमता
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की मौजूदा ताकत उसे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित करने की क्षमता देती है.
यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है. ऐसे में यदि यहां कोई व्यवधान पैदा होता है, तो उसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ सकता है.
तेजी से हो रही रिकवरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई तेजी से कर रहा है. अनुमान है कि मरम्मत और पुनर्स्थापन के बाद वह अपने ड्रोन जखीरे का करीब 70% तक दोबारा हासिल कर सकता है.
मिसाइल सिस्टम के मामले में भी स्थिति मजबूत होती दिख रही है. पहले जहां लगभग आधे लॉन्चर ही सक्रिय थे, वहीं अब बंकर और गुफाओं में छिपाए गए करीब 100 सिस्टम दोबारा चालू किए जा चुके हैं. इससे उसकी ऑपरेशनल क्षमता बढ़कर लगभग 60% तक पहुंच गई है.
इस बीच मोहम्मद बाघेर कालिबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उनका कहना है कि यदि अमेरिका ने कोई भी गलती की, तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा.
बदलती रणनीति और पुराना इतिहास
विशेषज्ञ बताते हैं कि भले ही ईरान ने अभी तक होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया है, लेकिन उसके पास ऐसा करने की क्षमता जरूर है.
इतिहास में भी ईरान-इराक युद्ध के दौरान ईरान ने समुद्री रास्तों को बाधित करने के लिए बारूदी सुरंगों का इस्तेमाल किया था. हालांकि अब उसकी रणनीति अधिक आधुनिक हो चुकी है, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों के जरिए निशाना बनाने की क्षमता शामिल है.
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