दुश्मनों की बढ़ेगी टेंशन! भारत में 100 Su-57 फाइटर जेट बनाने को तैयार रूस, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर भरी हामी

India Russia Su 57 Deal: रूस ने भारत को एक बड़ा रक्षा प्रस्ताव दिया है, जो पिछले कई सालों में सबसे अहम माना जा रहा है. इस प्रस्ताव में भारत में कम से कम 100 Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने की बात कही गई है.

Russia ready to make 100 Su-57 fighter jets in India agrees to technology transfer
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India Russia Su 57 Deal: रूस ने भारत को एक बड़ा रक्षा प्रस्ताव दिया है, जो पिछले कई सालों में सबसे अहम माना जा रहा है. इस प्रस्ताव में भारत में कम से कम 100 Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट बनाने की बात कही गई है. खास बात यह है कि इसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की भी पेशकश शामिल है. यह ऑफर ऐसे समय आया है, जब भारतीय वायुसेना के पास लड़ाकू विमानों की कमी बनी हुई है.

इस समय भारतीय वायुसेना के पास करीब 30 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42 स्क्वाड्रन की है. इसी कमी को देखते हुए रूस इस मौके को एक बड़े सहयोग में बदलना चाहता है. रूस सिर्फ विमान बेचने की बात नहीं कर रहा, बल्कि वह एक पूरा मैन्युफैक्चरिंग सिस्टम भारत में खड़ा करना चाहता है, जिससे देश में ही इन विमानों का निर्माण हो सके.

नासिक में निर्माण का प्रस्ताव

रूस ने सुझाव दिया है कि इन फाइटर जेट का उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के नासिक प्लांट में किया जाए. यहां पहले से Su-30MKI का उत्पादन होता रहा है.

HAL के अनुसार, रूसी टीम ने नासिक प्लांट का निरीक्षण किया है और पाया कि वहां मौजूद करीब 50% सुविधाओं का इस्तेमाल Su-57 बनाने के लिए किया जा सकता है. बाकी के लिए नए निवेश की जरूरत होगी.

वायुसेना की अलग प्राथमिकता

हालांकि, भारतीय वायुसेना की सोच इससे थोड़ी अलग है. वह फिलहाल 40 से 60 स्टेल्थ फाइटर सीधे खरीदना चाहती है, ताकि जल्दी से अपनी ताकत बढ़ा सके. सरकार भी पहले से कई स्वदेशी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, इसलिए इतने बड़े प्रोडक्शन प्रोग्राम में तुरंत शामिल होना आसान नहीं माना जा रहा.

रणनीतिक दुविधा

भारत के सामने अब एक अहम फैसला है. उसे तय करना होगा कि वह रूस के इस बड़े प्रस्ताव को स्वीकार करे या अपने घरेलू प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे. यह फैसला आगे तय करेगा कि भारत भविष्य में विदेशी तकनीक पर निर्भर रहेगा या खुद की तकनीक को मजबूत करेगा.

रूस की शर्त और निवेश

रूस चाहता है कि भारत कम से कम 100 विमानों का ऑर्डर दे. उसका मानना है कि इससे कम संख्या में इस तरह की हाई-टेक उत्पादन सुविधा बनाना फायदेमंद नहीं होगा. इस प्रोजेक्ट में रडार से बचने वाली कोटिंग, एडवांस सिस्टम और इंजन सपोर्ट जैसी महंगी तकनीकों में निवेश करना पड़ेगा.

नासिक को बनाया जा सकता है हब

रूस नासिक को Su-57 के लिए एक खास मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहता है. यहां पहले से रूसी विमानों के साथ काम करने का अनुभव है, जिससे काम आसान हो सकता है. लेकिन इसके लिए नई असेंबली लाइन, कंपोजिट मटेरियल यूनिट, सॉफ्टवेयर लैब और स्टेल्थ कोटिंग जैसी सुविधाएं भी जोड़नी होंगी.

लोकल उत्पादन का प्लान

रूस ने यह भी बताया है कि शुरुआत में विमान के कुछ हिस्से बाहर से आएंगे और भारत में जोड़े जाएंगे. धीरे-धीरे भारत की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी. ऐसा मॉडल पहले भी Su-30MKI में अपनाया गया था, जिसमें समय के साथ भारत की भागीदारी बढ़ी थी.

वायुसेना क्यों है सतर्क

भारतीय वायुसेना इतनी बड़ी डील को लेकर सावधानी बरत रही है. उसका मानना है कि पहले कुछ विमान सीधे खरीदकर तुरंत इस्तेमाल में लाना जरूरी है. वहीं दूसरी तरफ, वायुसेना पहले से ही कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है, जैसे Tejas Mk1A, Tejas Mk2 और MRFA प्रोग्राम.

AMCA और अन्य प्रोजेक्ट्स का दबाव

भारत का सबसे बड़ा स्वदेशी प्रोजेक्ट AMCA है, जिसके तहत 2030 के दशक में 120 से ज्यादा स्टेल्थ फाइटर बनाने की योजना है. सरकार को चिंता है कि अगर Su-57 प्रोजेक्ट पर ज्यादा पैसा खर्च किया गया, तो इससे AMCA की रफ्तार धीमी हो सकती है.

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की अहमियत

रूस इस डील को आकर्षक बनाने के लिए बड़े स्तर पर टेक्नोलॉजी ट्रांसफर देने को तैयार है. इसमें सोर्स कोड तक पहुंच, लोकल सिस्टम जोड़ने की आजादी और भविष्य में भारतीय तकनीक शामिल करने की सुविधा भी हो सकती है. यही वजह है कि यह प्रस्ताव भारत के लिए काफी अहम माना जा रहा है और आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला लिया जा सकता है.

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