Arrow vs THAAD: इजरायल-अमेरिका में किसका मिसाइल सिस्टम बेहतर? जानिए कौन मचा सकता है ज्यादा तबाही

हूती विद्रोहियों ने यमन से इजरायल को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं. कुछ ही समय बाद इजरायली एरो मिसाइल सिस्टम और अमेरिकी THAAD मिसाइल सिस्टम ने इन मिसाइलों को मार गिराया.

Arrow vs THAAD Israel and America who can cause more destruction
प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo: Freepik

वाशिंगटनः रविवार को हूती विद्रोहियों ने यमन से इजरायल को निशाना बनाकर दो बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं. जैसे ही इन मिसाइलों के लॉन्च होने की खबर इजरायल में पहुंची, हूटर बजने लगे और लोगों को बंकरों और शेल्टर होम में सुरक्षित स्थानों पर छिपने की सलाह दी गई. हजारों इजरायली नागरिकों ने इन स्थानों पर पनाह ली. लेकिन, इसके कुछ ही समय बाद इजरायली एरो मिसाइल सिस्टम और अमेरिकी THAAD मिसाइल सिस्टम ने इन मिसाइलों को मार गिराया. इनके मलबे इजरायल के हेब्रोन इलाके में जमीन पर बिखरे हुए मिले. इस घटना से एक सवाल उठता है कि इन दोनों मिसाइल इंटरसेप्टर सिस्टम्स की लागत कितनी है और कौन सा सिस्टम ज्यादा महंगा है.

अमेरिका ने इजरायल में क्यों तैनात किया THAAD?

अमेरिका ने THAAD मिसाइल सिस्टम को पिछले साल अक्टूबर में इजरायल में तैनात किया था. यह कदम बाइडन प्रशासन के उस डर से उठाया गया था कि ईरान इजरायल पर मिसाइल हमले कर सकता है. इसलिए इजरायल के एयर डिफेंस को और मजबूत करने के लिए THAAD को तैनात किया गया था. THAAD और इजरायली एरो सिस्टम दोनों ही शक्तिशाली हैं, लेकिन इनकी डिजाइन और संचालन का तरीका अलग है. दोनों सिस्टम 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद विकसित किए गए थे, जब इराक की स्कड मिसाइलों को रोकने के लिए पैट्रियट सिस्टम विफल हो गया था.

एरो और THAAD सिस्टम के विकास का इतिहास

पैट्रियट को पहले एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन बाद में इसे बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के लिए बदला गया. युद्ध के दौरान पैट्रियट की विफलता के बाद अमेरिका और इजरायल दोनों ने महसूस किया कि एक समर्पित सिस्टम की आवश्यकता है. इजरायल की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने एरो 2 प्रणाली को विकसित किया, जबकि लॉकहीड मार्टिन ने अमेरिकी सेना के लिए THAAD विकसित किया.

हालांकि, एरो का विकास हमेशा सुचारू नहीं रहा और इसे परीक्षणों में कई बार विफलता का सामना करना पड़ा. वहीं, THAAD का विकास भी धीमा था. नतीजतन, एरो को 1998 में इजरायली वायु सेना को सौंप दिया गया और यह 2000 में सेवा में आया, जबकि THAAD 2008 में सेवा में आया.

दोनों प्रणालियों के बीच अंतर

इन दोनों प्रणालियों का मुख्य उद्देश्य समान है, यानी बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करना, लेकिन इनका काम करने का तरीका और लागत बहुत अलग है. इजरायली एरो सिस्टम एक मिसाइल को लक्ष्य के पास जाकर उसे गर्म धातु के टुकड़ों से नष्ट कर देता है, जबकि अमेरिकी THAAD "हिट टू किल" पर जोर देता है, यानी लक्ष्य को सीधे हिट करके नष्ट करना. THAAD में लक्ष्य को ट्रैक करने और मिसाइल को लॉन्च करने में उच्च सटीकता की जरूरत होती है, लेकिन इसमें विस्फोटक वारहेड की आवश्यकता नहीं होती.

समान गति, लेकिन अलग डिजाइन और वजन

दोनों प्रणालियां 9,000-10,000 किमी/घंटा की समान गति तक पहुंच सकती हैं. हालांकि, THAAD हल्का है और इसे कार्गो विमानों द्वारा युद्ध क्षेत्रों में ले जाया जा सकता है. वहीं, इजरायली एरो भारी है, क्योंकि इसे इजरायल को स्थिर ठिकानों से बचाने के लिए डिजाइन किया गया था, या फिर इसे ट्रकों के जरिए नई साइट्स पर तैनात किया जा सकता है.

लागत में बड़ा अंतर

इन दोनों प्रणालियों के बीच सबसे बड़ा अंतर उनकी लागत में है. एक एरो इंटरसेप्टर की कीमत $2-3 मिलियन के बीच है, जबकि THAAD इंटरसेप्टर की कीमत लगभग $12-15 मिलियन है. यही कारण है कि THAAD को केवल UAE और सऊदी अरब ने खरीदा है, जो इसकी भारी लागत वहन कर सकते हैं. जर्मनी ने एरो 3 और THAAD दोनों का मूल्यांकन किया और अंत में इजरायली एरो सिस्टम को चुना.

THAAD का पहला ऑपरेशनल इंटरसेप्शन

THAAD ने अपना पहला ऑपरेशनल इंटरसेप्शन जनवरी 2022 में UAE में किया, जब इसे हूतियों की एक मिसाइल के खिलाफ लॉन्च किया गया था. THAAD इजरायल को पहले से उपलब्ध एरो सिस्टम से ज्यादा क्षमता तो नहीं देता, लेकिन यह अतिरिक्त इंटरसेप्शन सिस्टम इजरायली वायु सेना की क्षमता को बढ़ाता है और ईरान से आने वाली और बड़ी मिसाइलों को नष्ट करने की क्षमता बढ़ाता है.

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