तेजस MK1 पर अमेरिका की 'दगाबाजी', अब भारत ने 'दोस्त' पुतिन के लिए खोले दरवाजे; बिलबिला उठेंगे चीन-पाकिस्तान

भारत ने रूस को अपने फाइटर जेट के इंजन से जुड़ी बातचीत में शामिल करने का बड़ा कदम उठाया है.

America betrayal on Tejas MK1 India opened doors for Russia China and Pakistan will tremble
मोदी-पुतिन-ट्रंप | Photo: ANI

भारत और रूस के बीच संबंधों को हमेशा से मजबूत और विश्वासपूर्ण माना जाता है. हाल ही में, भारत ने रूस को अपने फाइटर जेट के इंजन से जुड़ी बातचीत में शामिल करने का बड़ा कदम उठाया है. इसका कारण यह है कि भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1 उत्पादन में मुश्किलों का सामना कर रहा है, खासकर इंजन के मुद्दे पर. अमेरिका के साथ कई साल पहले हुए इंजन सौदे के बावजूद, वह बार-बार बहाने बना रहा है, जिससे भारत का विश्वास अमेरिका से टूट चुका है. अब, भविष्य में अमेरिकी धोखेबाजी से बचने के लिए, भारत ने अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस को इस बातचीत में शामिल करने का निर्णय लिया है.

स्टेल्थ, मल्टी-रोल लड़ाकू विमान

भारत का एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट एक स्टेल्थ, मल्टी-रोल लड़ाकू विमान बनाने पर केंद्रित है, और ऐसे विमानों के लिए एक बेहतरीन इंजन की आवश्यकता होती है. इस लिहाज से रूस का इंजन तकनीक भारत के लिए एक अहम विकल्प बन सकता है. पहले भारत पश्चिमी देशों की कंपनियों जैसे जनरल इलेक्ट्रिक (अमेरिका), सफ्रान (फ्रांस), और रोल्स रॉयस (यूके) से बातचीत कर रहा था, लेकिन पश्चिमी देशों से बार-बार धोखाधड़ी और जटिलताएं सामने आ रही थीं. इस स्थिति में, भारत ने रूस को बातचीत का हिस्सा बनाने का निर्णय लिया है, ताकि वह अपने लक्ष्यों को हासिल कर सके और पश्चिमी देशों के साथ सौदा करने के पहले सोच-समझ कर कदम उठा सके.

AL-41F1 और AL-51 इंजन की टेक्नोलॉजी

रूस की सरकारी डिफेंस कंपनी रोस्टेक ने भारत के सामने अपने 177S इंजन का प्रस्ताव रखा है. यह इंजन खासतौर पर पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए डिज़ाइन किया गया है, और इसे AL-41F1 और AL-51 इंजन की टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया है. 177S इंजन में अधिक थ्रस्ट, बेहतर ईंधन दक्षता और लंबी उड़ान की क्षमता का दावा किया गया है. यह इंजन भारत के AMCA प्रोजेक्ट के लिए बेहद उपयुक्त साबित हो सकता है, क्योंकि इसकी अधिकतम थ्रस्ट क्षमता लगभग 142 kN (14,500kgf) है और इसकी सर्विस लाइफ 6,000 घंटे तक हो सकती है, जो वर्तमान में उपयोग हो रहे पुराने इंजन से कहीं अधिक है.

इसके अलावा, यह इंजन ईंधन की खपत में कम से कम 7% की कमी करने में सक्षम है, जो स्टेल्थ विमान जैसे AMCA के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. रूस ने यह भी सुझाव दिया है कि भारत इस इंजन के प्रदर्शन को अपने अनुसार डिजाइन कर सकता है, जैसे कि 2D फ्लैट नोजल डिजाइन को शामिल करना, जो अमेरिकी एफ-22 रालोर पर इस्तेमाल किया गया था.

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