भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर उसका फैसला पूरी तरह राष्ट्रीय हित पर आधारित है और इसके लिए उसे किसी देश की अनुमति की आवश्यकता नहीं है. सरकारी सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूस से तेल खरीदना कभी बंद नहीं किया और फरवरी में भी रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा.
यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित व्यापार समझौते में 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ हटाने को भारत द्वारा रूसी तेल खरीद रोकने के कथित वादे से जोड़े जाने की चर्चा हुई थी.
ऊर्जा खरीद में तीन प्रमुख मानदंड
अधिकारियों ने बताया कि भारत के ऊर्जा आयात संबंधी फैसले तीन मुख्य आधारों पर लिए जाते हैं- सामर्थ्य (किफायती कीमत), उपलब्धता और स्थिर आपूर्ति.
एक सरकारी सूत्र के अनुसार, भारत वहां से कच्चा तेल खरीदता है जहां पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध हो, कीमत प्रतिस्पर्धी हो और डिलीवरी संभव हो. यही नीति आगे भी जारी रहेगी.
अमेरिकी ‘30 दिन की छूट’ पर भी टिप्पणी
सूत्रों ने कहा कि भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देने की अमेरिकी घोषणा मुख्य रूप से घरेलू राजनीतिक संदेश के लिए थी.
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने भारतीय कंपनियों को समुद्र में मौजूद रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी अनुमति दी है, ताकि वैश्विक बाजार में आपूर्ति बनी रहे और ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित अवरोध से पैदा दबाव कम किया जा सके.
अमेरिकी ऊर्जा सचिव का बयान
अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने भी कहा कि कच्चे तेल की वैश्विक उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए वाशिंगटन ने दक्षिण एशिया क्षेत्र में मौजूद अतिरिक्त रूसी तेल की खरीद के लिए भारत से संपर्क किया था.
रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी जारी रही खरीद
सरकारी अधिकारियों के अनुसार 2022 में शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत ने मॉस्को से तेल खरीदना जारी रखा. उस समय अमेरिका और यूरोपीय संघ की आपत्तियों के बावजूद भारत ने यह फैसला लिया क्योंकि रूस कच्चे तेल पर भारी छूट दे रहा था और भारतीय रिफाइनरियों की मांग भी अधिक थी.
ऊर्जा सुरक्षा के लिए बढ़ाया सप्लायर नेटवर्क
भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कच्चे तेल के आपूर्तिकर्ताओं की संख्या भी बढ़ाई है.
इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक क्षेत्र या समुद्री मार्ग पर निर्भरता कम करना है.
अधिकारियों के मुताबिक भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत ही होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है, जबकि करीब 60 प्रतिशत अन्य सप्लाई मार्गों से पहुंचता है.
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