Middle East War Impact: अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है. इस स्थिति में भारत का करीब 11.8 अरब डॉलर (लगभग 1.06 लाख करोड़ रुपये) का कृषि और खाद्य निर्यात जोखिम में आ गया है.
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक समुद्री मार्गों में बाधा, बढ़ती बीमा लागत और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण पश्चिम एशिया को निर्यात करना कठिन हो सकता है. अगर क्षेत्र में तनाव लंबा चलता है तो इसका असर केवल निर्यात के आंकड़ों पर ही नहीं बल्कि किसानों की आय पर भी पड़ सकता है.
पश्चिम एशिया भारत के लिए बड़ा बाजार
भारत बड़ी मात्रा में चावल, केला, प्याज, सब्जियां, दालें, मेवे, कॉफी और चाय जैसे कृषि उत्पाद पश्चिम एशिया के देशों को निर्यात करता है.
साल 2025 में भारत के कुल वैश्विक कृषि निर्यात का लगभग 21.8 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में गया था. खाड़ी देशों में बड़ी भारतीय आबादी और भौगोलिक नजदीकी के कारण यह क्षेत्र भारतीय उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण बाजार माना जाता है.
चावल के निर्यात पर सबसे बड़ा खतरा
पश्चिम एशिया भारत के चावल निर्यात का प्रमुख गंतव्य है. पिछले वर्ष भारत ने इस क्षेत्र को 4.43 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया था, जो कुल वैश्विक चावल निर्यात का 36.7 प्रतिशत है.
अगर युद्ध लंबा चलता है तो इसका असर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के किसानों की आय पर पड़ सकता है.
मसाले, कॉफी और चाय का बड़ा कारोबार
पिछले साल भारत ने पश्चिम एशिया को 7.48 अरब डॉलर के अनाज और मसाले निर्यात किए थे. इसके अलावा कई अन्य कृषि उत्पाद भी बड़े पैमाने पर भेजे गए:
युद्ध के कारण शिपिंग मार्गों में बाधा आने से इन उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ सकता है.
डेयरी और प्रोसेस्ड फूड भी प्रभावित
पश्चिम एशिया में भारत के प्रोसेस्ड फूड और कोको उत्पादों का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा था, जिसका आकार करीब 1.35 अरब डॉलर तक पहुंच गया था.
इसके अलावा:
पेय पदार्थों में सबसे ज्यादा निर्भरता
मादक और गैर-मादक पेय पदार्थों के मामले में भारत की निर्भरता पश्चिम एशिया पर और भी अधिक है. इस श्रेणी में कुल निर्यात का करीब 43.3 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र में जाता है.
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