Middle East War: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे संसद में भी चर्चा का विषय बने. संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन राज्यसभा में इस विषय को लेकर बहस की मांग की गई. कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने नियम 176 के तहत पश्चिम एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की अनुमति मांगी.
इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने राज्यसभा में स्थिति स्पष्ट की और कहा कि भारत सरकार क्षेत्र में मौजूद अपने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है.
भारतीयों को सुरक्षित निकालने की कोशिश
विदेश मंत्री ने सदन को बताया कि मिडिल ईस्ट में हालात अभी भी काफी तनावपूर्ण हैं, लेकिन भारत सरकार वहां मौजूद भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने और उन्हें हर संभव सहायता पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने बताया कि कुछ भारतीयों को आर्मेनिया के रास्ते सुरक्षित स्थानों तक लाया जा रहा है.
जयशंकर ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र में स्थित भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय हैं और वहां रहने वाले भारतीय नागरिकों को आवश्यक मदद और जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है.
राज्यसभा में हंगामे के बीच दिया बयान
जब विदेश मंत्री इस विषय पर राज्यसभा में अपनी बात रख रहे थे, उस दौरान विपक्ष के कुछ सांसदों ने आपत्ति जताई और सदन में नारेबाजी भी हुई. इसके बावजूद जयशंकर ने हंगामे के बीच अपना बयान जारी रखा और सरकार की स्थिति स्पष्ट की.
उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने 20 फरवरी को एक आधिकारिक बयान जारी कर क्षेत्र में बढ़ते तनाव को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की थी. साथ ही सभी पक्षों से संयम बरतने और स्थिति को शांत करने की अपील भी की गई थी.
कूटनीति और संवाद पर जोर
विदेश मंत्री ने कहा कि भारत का मानना है कि किसी भी संघर्ष का स्थायी समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है. इसलिए भारत लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि सभी पक्ष तनाव कम करने और शांति स्थापित करने के लिए संवाद का रास्ता अपनाएं.
प्रधानमंत्री कर रहे हालात की निगरानी
जयशंकर ने सदन को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रमों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं. इसके साथ ही विभिन्न मंत्रालय भी एक-दूसरे के साथ समन्वय बनाकर स्थिति के अनुसार आवश्यक कदम उठा रहे हैं.
उन्होंने कहा कि यह संघर्ष भारत के लिए विशेष रूप से चिंता का विषय है क्योंकि पश्चिम एशिया भारत का पड़ोसी क्षेत्र है और वहां की स्थिरता का सीधा प्रभाव भारत पर पड़ता है.
खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय
विदेश मंत्री ने जानकारी दी कि खाड़ी क्षेत्र के विभिन्न देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं. इसके अलावा ईरान में भी शिक्षा और रोजगार के लिए कुछ हजार भारतीय मौजूद हैं.
ऐसे में क्षेत्र में बढ़ता तनाव भारत के लिए सिर्फ एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं बल्कि मानवीय और रणनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है.
ऊर्जा सुरक्षा और सप्लाई चेन पर असर
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम क्षेत्र है. भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आने वाले तेल और गैस पर निर्भर करता है.
उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा संघर्ष के कारण आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं और क्षेत्रीय अस्थिरता जैसी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, जिनका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ सकता है.
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