ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने खाड़ी में स्थित तीन महत्वपूर्ण द्वीपों पर नई मिसाइल सिस्टम तैनात की हैं. ये मिसाइल सिस्टम दुश्मन के ठिकानों, जहाजों और संपत्तियों को निशाना बनाने में सक्षम हैं. ये मिसाइल सिस्टम ग्रेटर टुंब, लेसर टुंब और अबू मूसा द्वीपों पर तैनात किए गए हैं, जो होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित हैं. यह जलडमरूमध्य दुनिया का एक महत्वपूर्ण शिपिंग रूट है.
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच विवाद
यह मिसाइल तैनाती उस समय हुई है, जब ईरान का इन तीनों द्वीपों पर 1971 से नियंत्रण है. हालांकि, इन द्वीपों पर ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक विवाद भी रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है. ईरान ने इन द्वीपों को अपनी सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माना है और अब उन्होंने इनपर मिसाइल सिस्टम तैनात कर दिए हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति की चेतावनी और बढ़ता तनाव
ईरान की मिसाइल तैनाती ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत फिर से शुरू करने का आग्रह किया है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने वार्ता को फिर से शुरू नहीं किया, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई पर विचार कर सकता है. ईरान की इस मिसाइल तैनाती से क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ सकता है.
ईरान की ताकत बढ़ाने की रणनीति
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के नौसेना कमांडर अलीरेजा तांगसिरी ने कहा कि ईरान की रणनीति है कि वह इस द्वीप समूह पर अपनी ताकत बढ़ाए. उन्होंने बताया कि अब ईरान किसी भी दुश्मन के ठिकानों, जहाजों और संपत्तियों पर हमला करने में सक्षम है. इसका मतलब यह है कि ईरान इन द्वीपों का उपयोग अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए करने के लिए तैयार है.
नई मिसाइल सिस्टम की ताकत और रेंज
ईरान का दावा है कि उसकी नई मिसाइल सिस्टम 600 किलोमीटर (370 मील) तक किसी भी लक्ष्य को पूरी तरह से नष्ट कर सकती है. इससे ईरान की सैन्य क्षमता में काफी इजाफा हुआ है और अब वह क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का मुकाबला करने के लिए बेहतर तरीके से तैयार है.
अयातुल्ला खामेनेई का बयान
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने कहा कि अमेरिका की धमकियों से ईरान को कोई फर्क नहीं पड़ता. उन्होंने कहा कि अगर कोई ईरान के साथ बुरा करने की कोशिश करेगा तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा. इस बयान से यह साफ है कि ईरान किसी भी बाहरी दबाव के सामने झुकने को तैयार नहीं है.
अमेरिका की कोशिश और मध्य पूर्व में स्थिति
अमेरिका के मध्य पूर्व दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिश यह है कि वह तेहरान के साथ विश्वास कायम कर सकें और सशस्त्र संघर्ष को टाल सकें. अमेरिका इस मसले का हल बातचीत से निकालने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान अपने सैन्य शक्ति को बढ़ाकर किसी भी खतरे का सामना करने के लिए तैयार है.
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