US Missile Stock: ईरान के साथ अमेरिका की जंग का असर अब मिडिल ईस्ट से आगे भी दिखाई देने लगा है. ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने के लिए अमेरिका ने बड़ी संख्या में मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया है. इससे अमेरिकी सेना के सामने अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि अगर चीन या रूस की ओर से कोई बड़ा खतरा पैदा होता है तो क्या अमेरिका उसके लिए पर्याप्त हथियार जुटा पाएगा.
हथियारों का स्टॉक चिंता का कारण
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों को डर है कि मिडिल ईस्ट में इस्तेमाल किए गए और वहां भेजे गए हथियारों की वजह से देश की दूसरी जगहों पर रक्षा तैयारी प्रभावित हो सकती है. यूरोप में हथियारों की कमी को लेकर चिंता ज्यादा बताई जा रही है.
अधिकारियों के अनुसार, पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाले पीएसी-3 इंटरसेप्टर और एटीएसीएमएस मिसाइलों का भंडार काफी कम हो गया है. इसके अलावा सटीक निशाने वाली मिसाइलें, गाइडेड रॉकेट और थाड इंटरसेप्टर भी यूरोप से मिडिल ईस्ट भेजे गए हैं. इससे अमेरिकी सेना की यूरोप से जुड़ी कुछ योजनाओं में बदलाव करना पड़ा है.
कितने हथियार इस्तेमाल हुए?
रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई के मध्य तक अमेरिका ने करीब 1,700 पैट्रियट एयर डिफेंस इंटरसेप्टर और 200 से ज्यादा थाड इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया था. अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए करीब 150 स्टैंडर्ड मिसाइल इंटरसेप्टर भी दागे.
दूसरी ओर, ईरान ने इस संघर्ष के दौरान 1,500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 6,000 बड़े ड्रोन इस्तेमाल किए. ऐसे में अमेरिका के सामने चुनौती केवल इस्तेमाल किए गए हथियारों को दोबारा तैयार करने की नहीं है, बल्कि आने वाले समय के लिए पर्याप्त भंडार बनाए रखने की भी है.
ताइवान और यूक्रेन पर पड़ सकता है असर
ईरानी हमलों से अपनी सेना और जरूरी ठिकानों को बचाने के लिए अमेरिका ने यूरोप और प्रशांत क्षेत्र से भी एयर डिफेंस यूनिट्स को मिडिल ईस्ट भेजा है. इन यूनिट्स की तैनाती लंबे समय तक रहने से अमेरिकी सेना की दूसरी जगहों पर तुरंत कार्रवाई करने की क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है.
इसका असर ताइवान के मामले में भी महत्वपूर्ण हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि अगर चीन आने वाले समय में ताइवान पर हमला करता है तो कम हथियारों और सीमित एयर डिफेंस सिस्टम के कारण अमेरिका अपनी सभी योजनाओं को एक साथ लागू करने में मुश्किल महसूस कर सकता है.
यूक्रेन को अमेरिकी मदद पर भी इसका असर पड़ सकता है. रूस लगातार मिसाइल हमले कर रहा है और ऐसे में यूक्रेन को एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की जरूरत बनी हुई है. लेकिन पश्चिमी देशों के अपने भंडार पर पहले से दबाव है, जिससे यूक्रेन को अतिरिक्त सिस्टम और मिसाइलें देना मुश्किल हो सकता है.
सहयोगियों को हथियार मिलने में देरी
अमेरिका से हथियार खरीदने वाले उसके सहयोगी देशों को भी डिलीवरी में देरी का सामना करना पड़ रहा है. इससे पश्चिमी देशों की हथियार बनाने की क्षमता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं.
जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे देशों से इस्तेमाल के लिए हटाए गए हथियारों के भंडार को दोबारा भरने में कई साल लग सकते हैं. ऐसे में अमेरिका को एक तरफ मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य जरूरतें पूरी करनी हैं, वहीं दूसरी तरफ चीन और रूस जैसे संभावित खतरों के लिए भी हथियारों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है.
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