अब समुद्र के नीचे दुश्मन की हर चाल पर होगी नजर, आज नौसेना में शामिल होगा INS निपुण, जानें खासियत

भारतीय नौसेना सोमवार (31 अगस्त) को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में निस्तार श्रेणी के दूसरे डाइविंग सपोर्ट वेसल (गोताखोरी सहायक पोत) INS निपुण को अपने बेड़े में शामिल करेगी.

indigenous vessel INS Nipun to be inducted into the Indian Navy today
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INS Nipun: भारतीय नौसेना सोमवार (31 अगस्त) को मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में निस्तार श्रेणी के दूसरे डाइविंग सपोर्ट वेसल (गोताखोरी सहायक पोत) INS निपुण को अपने बेड़े में शामिल करेगी. विशाखापत्तनम की हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने इस पोत को तैयार किया है. इसके नौसेना में शामिल होने से गहरे समुद्र में गोताखोरी, बचाव और समुद्र के नीचे मदद पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी. INS निपुण इस श्रेणी का दूसरा पोत है. इससे पहले INS निस्तार को नौसेना में शामिल किया गया था.

INS निपुण करीब 75 फीसदी स्वदेशी सामग्री से बनाया गया है. इसे पिछले महीने 30 जुलाई को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था. अब औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल होने के बाद यह उसके कामकाजी बेड़े का हिस्सा बन जाएगा. यह करीब 118 मीटर लंबा है और इसका वजन 8,560 टन से ज्यादा है.

गहरे समुद्र में काम करने की खास क्षमता

INS निपुण को खास तौर पर समुद्र की गहराई में होने वाले मुश्किल अभियानों के लिए तैयार किया गया है. इसमें डीप-सी सैचुरेशन डाइविंग की सुविधा है, जिससे गोताखोर लंबे समय तक गहरे पानी में काम कर सकते हैं. इसके अलावा यह पनडुब्बी बचाव अभियान में भी अहम भूमिका निभाएगा. ऐसे अभियानों में तेजी से मदद पहुंचाना बेहद जरूरी होता है.

करीब 75 फीसदी स्वदेशी सामग्री

INS निपुण के जरिए भारतीय नौसेना की समुद्र के नीचे काम करने की क्षमता और मजबूत होगी. यह डीप-सी डाइविंग के साथ अंडरवाटर ऑपरेशन, मलबा हटाने और पनडुब्बी बचाव जैसे अभियानों में मदद करेगा. जरूरत पड़ने पर यह डीएसआरवी यानी पनडुब्बी बचाव वाहन के लिए मदर शिप की तरह भी काम कर सकता है.

इस पोत में आरओवी यानी रिमोट से चलने वाले पानी के भीतर के वाहन भी लगाए गए हैं. इनकी मदद से समुद्र की गहराई में निगरानी, खोज और जांच का काम किया जा सकता है. हिंद महासागर में बढ़ती समुद्री चुनौतियों के बीच INS निपुण भारतीय नौसेना की क्षमता को और मजबूत करेगा.

समुद्र के नीचे के मिशनों में आएगा काम

INS निपुण सामान्य युद्धपोत से अलग है. इसकी मुख्य भूमिका दुश्मन पर हमला करना नहीं, बल्कि समुद्र के नीचे होने वाले मुश्किल अभियानों में सहायता देना है. गहरे पानी में गोताखोरी, पनडुब्बी बचाव, समुद्र के भीतर निगरानी और मलबा हटाने जैसे काम इसकी जिम्मेदारी में होंगे.

मुंबई में आज कमीशन होने के बाद INS निपुण भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल क्षमता का हिस्सा बन जाएगा. इससे नौसेना को समुद्र की गहराई में लंबे और जटिल अभियानों के दौरान एक मजबूत सहायक पोत मिलेगा.

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