PM Modi Uzbekistan Visit: चीन-पाकिस्तान को लगेगी मिर्ची! मुस्लिम देश से PM Modi लाए भारत के लिए ‘सबसे बड़ा खजाना’

PM Modi Central Asia Visit: उज्बेकिस्तान दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरेनियम की दीर्घकालिक सप्लाई, क्रिटिकल मिनरल्स, ऊर्जा, रक्षा और व्यापार को लेकर अहम समझौते किए हैं.

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PM Modi Central Asia Visit: मध्य एशिया में बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा भारत की कूटनीति के लिए बेहद अहम माना जा रहा है. ताशकंद में भारत और उज्बेकिस्तान ने अपने रिश्तों को नई दिशा देने के साथ ऊर्जा, व्यापार, रक्षा, डिजिटल कनेक्टिविटी और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी का बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल होना इस दौरे को और रणनीतिक बना देता है.

मध्य एशिया लंबे समय से चीन, अमेरिका और रूस जैसी बड़ी शक्तियों के प्रभाव का केंद्र रहा है. भारत के लिए इस क्षेत्र का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, कनेक्टिविटी और रणनीतिक पहुंच से भी जुड़ा है. ऐसे में ताशकंद और बिश्केक की यात्रा को भारत की उसी व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके जरिए नई दिल्ली मध्य एशिया में अपनी मौजूदगी और साझेदारी को मजबूत करना चाहती है.

ताशकंद में पीएम मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उज्बेकिस्तान यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण उन्हें दिया गया देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान रहा. राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने पीएम मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ ओली दरजाली दोस्तलिक’ से सम्मानित किया. यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच दोस्ती, आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी के योगदान के प्रतीक के तौर पर दिया गया. यह सम्मान इसलिए भी खास है क्योंकि पीएम मोदी पहले भारतीय नेता हैं जिन्हें उज्बेकिस्तान के इस सर्वोच्च सम्मान से नवाजा गया है. भारत और उज्बेकिस्तान के रिश्ते अब केवल पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि दोनों देश व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.

30 से ज्यादा देशों से मिल चुका है पीएम मोदी को सम्मान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वर्ष 2016 से अब तक कई देशों के सर्वोच्च या प्रतिष्ठित राजकीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है. उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान भी अब इसी सूची में शामिल हो गया है. इस सम्मान के साथ भारत की विदेश नीति में पीएम मोदी के व्यक्तिगत कूटनीतिक प्रभाव की चर्चा एक बार फिर तेज हुई है. साल 2026 में भी कई देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने प्रतिष्ठित सम्मानों से सम्मानित किया है. इनमें इथियोपिया, ओमान, इजरायल, स्वीडन, नॉर्वे, स्लोवाकिया, सेशेल्स और इंडोनेशिया के सम्मान शामिल बताए गए हैं. उज्बेकिस्तान का सम्मान इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि यह मध्य एशिया में भारत की बढ़ती रणनीतिक स्वीकार्यता का संकेत देता है.

ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा फोकस

ताशकंद में भारत और उज्बेकिस्तान की बातचीत का सबसे अहम पहलू ऊर्जा सुरक्षा रहा. दोनों देशों ने यूरेनियम की दीर्घकालिक आपूर्ति की व्यवस्था पर आगे बढ़ने पर सहमति जताई. भारत के लिए यह समझौता इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को आने वाले वर्षों में बड़े स्तर पर बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है. उज्बेकिस्तान पहले से भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करता रहा है. ऐसे में लंबी अवधि की आपूर्ति व्यवस्था भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए अतिरिक्त स्थिरता दे सकती है. इसके साथ ही दोनों देशों के बीच क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया. ऊर्जा और खनिजों के मोर्चे पर यह साझेदारी भारत की रणनीतिक जरूरतों के लिहाज से काफी अहम हो सकती है.

व्यापार, रक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी पर भी बनी सहमति

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव की बातचीत में व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी विशेष जोर रहा. दोनों देश आर्थिक संबंधों को विस्तार देने के साथ-साथ रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए.

डिजिटल कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने को भी द्विपक्षीय रिश्तों के अहम स्तंभ के तौर पर देखा गया. दोनों देशों के शहरों और राज्यों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में भी समझौतों और पहलों को आगे बढ़ाया गया. इस तरह ताशकंद में भारत ने सुरक्षा से लेकर अर्थव्यवस्था और ऊर्जा से लेकर तकनीक तक रिश्तों का दायरा व्यापक करने की कोशिश की.

दिखी रिश्तों की सांस्कृतिक तस्वीर

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे में कूटनीति के साथ भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की झलक भी देखने को मिली. उन्होंने उज्बेकिस्तान में आयोजित योग कार्यक्रम में हिस्सा लिया और वहां मौजूद लोगों के साथ योग किया. इसके बाद उन्होंने ताशकंद स्थित पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के स्मारक पर जाकर श्रद्धांजलि अर्पित की.

प्रधानमंत्री ने ताशकंद स्टेट यूनिवर्सिटी ऑफ ओरिएंटल स्टडीज स्थित महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा किया. यांगी उज़्बेकिस्तान स्मारक पर श्रद्धांजलि और भारतीय समुदाय के स्वागत ने दौरे को भावनात्मक आयाम भी दिया. बॉलीवुड और भारतीय शास्त्रीय संस्कृति की प्रस्तुतियों के जरिए दोनों देशों के बीच लोगों और संस्कृतियों के जुड़ाव की तस्वीर सामने आई.

चीन और पाकिस्तान के बीच भारत की रणनीति कितनी अहम?

मध्य एशिया में भारत के सामने चुनौती भी कम नहीं है. चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आर्थिक और बुनियादी ढांचे से जुड़े निवेश कर रहा है. वहीं पाकिस्तान भी इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश करता रहा है. भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती भौगोलिक कनेक्टिविटी की है, क्योंकि पाकिस्तान भारत को जमीनी रास्ते से मध्य एशिया तक सीधी पहुंच नहीं देता.

ऐसे में ईरान के चाबहार पोर्ट के जरिए मध्य एशिया तक पहुंच भारत की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उज्बेकिस्तान के साथ मजबूत संबंध भारत को इस क्षेत्र में आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के लिए एक अहम आधार दे सकते हैं. यही वजह है कि ताशकंद में हुई बातचीत को केवल द्विपक्षीय संबंधों के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं होगा.

सुरक्षा के मोर्चे पर भी उज्बेकिस्तान अहम साझेदार

मध्य एशिया की भौगोलिक स्थिति इसे सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील क्षेत्र बनाती है. अफगानिस्तान की स्थिति, आतंकवाद, कट्टरपंथ और ड्रग्स की तस्करी जैसी चुनौतियां भारत समेत पूरे क्षेत्र की चिंता का विषय हैं. ऐसे में उज्बेकिस्तान के साथ सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग बढ़ाना भारत के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है.

भारत और उज्बेकिस्तान के बीच सहयोग का विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्य एशिया में बड़ी शक्तियों के बीच प्रभाव बढ़ाने की होड़ तेज है. भारत के लिए इस क्षेत्र में भरोसेमंद साझेदारों का नेटवर्क तैयार करना भविष्य की विदेश नीति का अहम हिस्सा बन सकता है.

ताशकंद के बाद बिश्केक में होगी असली रणनीतिक परीक्षा

प्रधानमंत्री मोदी का अगला पड़ाव बिश्केक है, जहां वह शंघाई सहयोग संगठन के 26वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. SCO का मंच भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां रूस, चीन और मध्य एशिया के प्रमुख देशों के साथ एक ही मंच पर बातचीत का अवसर मिलता है. पाकिस्तान भी इस बहुपक्षीय मंच का हिस्सा है.

भारत इस सम्मेलन में सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसरों से जुड़े अपने दृष्टिकोण को सामने रख सकता है. आतंकवाद, चरमपंथ और अलगाववाद के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रह सकता है. इसके साथ ही मध्य एशिया के साथ कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग बढ़ाना भी भारत के एजेंडे का अहम हिस्सा होगा.

मोदी-पुतिन और मोदी-शी मुलाकात पर रहेंगी निगाहें

बिश्केक में प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ संभावित बातचीत पर भी दुनिया की नजर रहेगी. रूस के साथ भारत के रक्षा और ऊर्जा संबंध लंबे समय से रणनीतिक महत्व रखते हैं. वहीं चीन के साथ सीमा और व्यापार समेत कई मुद्दों पर बातचीत के बीच दोनों नेताओं की मुलाकात का अपना अलग कूटनीतिक महत्व होगा.

SCO का मंच भारत के लिए यह संदेश देने का भी अवसर है कि वह मध्य एशिया में किसी एक शक्ति के प्रभाव का हिस्सा बनने के बजाय अपने स्वतंत्र रणनीतिक हितों के आधार पर साझेदारियां विकसित करना चाहता है.

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