Pickaxe Mountain: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के पिकैक्स माउंटेन पर हमले की धमकी दी है. ट्रंप ने कहा है कि अमेरिकी सेना जल्द ही ईरान के इस ठिकाने को निशाना बना सकती है. पिकैक्स माउंटेन ईरान की नतान्ज यूरेनियम संवर्धन सुविधा के पास स्थित है. यह इलाका काफी सुरक्षित माना जाता है और बताया जाता है कि पहाड़ के करीब 400 फीट नीचे दो सुरंग परिसर बनाए गए हैं. ऐसे में इसे बंकर बस्टर बमों से निशाना बनाए जाने की आशंका जताई जा रही है. इससे पहले 2025 में भी अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था.
ट्रंप ने पिकैक्स माउंटेन पर कार्रवाई की बात तो कही है, लेकिन उन्होंने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को अमेरिका के लिए बड़ा युद्ध मानने से इनकार किया. ट्रंप ने कहा कि कई लोग इसे युद्ध नहीं मानते और वह इसे सैन्य संघर्ष कहते हैं. उनके मुताबिक, अमेरिका के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं है.
क्या है पिकैक्स माउंटेन?
पिकैक्स माउंटेन नतान्ज परमाणु परिसर के पास स्थित एक बेहद सुरक्षित जगह बताई जाती है. नतान्ज ईरान की प्रमुख यूरेनियम संवर्धन सुविधाओं में से एक है. माना जाता है कि पिकैक्स माउंटेन में जमीन के काफी नीचे सुरंगें बनाई गई हैं, जिससे यह जगह सामान्य हमलों से सुरक्षित रह सकती है.
हालांकि, इस जगह का असली इस्तेमाल क्या हो रहा है, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं है. इसे लेकर लंबे समय से कई तरह के दावे और अटकलें सामने आती रही हैं.
नतान्ज के पास बनाई जा रही थी नई सुविधा
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के पूर्व प्रमुख अली अकबर सालेही ने सितंबर 2020 में कहा था कि नतान्ज के पास पहाड़ों में एक ज्यादा आधुनिक और बड़ी सुविधा तैयार की जाएगी. हालांकि, उन्होंने उस समय पिकैक्स माउंटेन का नाम नहीं लिया था.
इसी वजह से यह साफ नहीं है कि पिकैक्स माउंटेन के अंदर वास्तव में यूरेनियम संवर्धन से जुड़ा कोई काम हो रहा है या नहीं. अमेरिका की ओर से इसे लेकर कई दावे किए गए हैं, लेकिन सार्वजनिक तौर पर इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है.
आईएईए को भी नहीं मिली पहुंच
पिकैक्स माउंटेन के अंदर क्या मौजूद है, इसकी सही जानकारी अभी भी दुनिया के सामने नहीं है. अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी यानी आईएईए को भी ईरान ने इस जगह पर निरीक्षण की अनुमति नहीं दी है.
आईएईए ने 2025 में बताया था कि ईरान के पास करीब 440 किलोग्राम यानी 970 पाउंड 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद था. इसी वजह से ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर अमेरिका और पश्चिमी देशों की चिंता लगातार बनी हुई है.
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