पाकिस्तान के 'सर्वेसर्वा' बने असीम मुनीर, सेना के कमांड सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव, भारत को खतरा?

पाकिस्तान ने अपने सैन्य कमांड सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है. इसे पिछले करीब 50 साल का सबसे बड़ा बदलाव बताया जा रहा है.

Asim Munir becomes Pakistan supreme authority army command system
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Pakistan Military Command Structure: पाकिस्तान ने अपने सैन्य कमांड सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है. इसे पिछले करीब 50 साल का सबसे बड़ा बदलाव बताया जा रहा है. इसका मकसद सेना के पुराने तालमेल वाले मॉडल की जगह एक केंद्रीकृत कमांड सिस्टम बनाना है. माना जा रहा है कि इससे आधुनिक युद्ध में जमीन, हवा, समुद्र, ड्रोन और साइबर जैसे सभी क्षेत्रों में बेहतर तालमेल हो सकेगा. इस बदलाव के बाद असीम मुनीर की ताकत काफी बढ़ गई है. उनके पास इतनी बड़ी जिम्मेदारी आने से पाकिस्तान के विपक्षी दलों में चिंता है. वहीं भारत भी इस बदलाव पर नजर रख रहा है.

असीम मुनीर के हाथ में बड़ा कमांड

पाकिस्तान में 27वें संविधान संशोधन के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है. इसे 1976 के बाद का सबसे बड़ा सैन्य पुनर्गठन बताया जा रहा है. नए ढांचे के तहत सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़े बड़े ऑपरेशनल और रणनीतिक फैसलों का नियंत्रण असीम मुनीर के पास आ गया है.

असीम मुनीर सेना प्रमुख और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज यानी सीडीएफ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इसके साथ ही वह प्रधानमंत्री के सलाहकार की भूमिका में भी हैं. इस तरह पाकिस्तान की सैन्य व्यवस्था में उनका प्रभाव पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है.

बदलाव के पीछे क्या वजह है?

पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञ इस बदलाव को आधुनिक युद्ध की जरूरतों से जोड़ रहे हैं. उनका कहना है कि अब युद्ध सिर्फ जमीन, हवा या समुद्र तक सीमित नहीं हैं. ड्रोन और साइबर जैसे नए क्षेत्र भी इसमें बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. ऐसे में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है.

पुरानी व्यवस्था में सेना की अलग-अलग शाखाएं कई मामलों में अलग तरीके से काम करती थीं. नए डिफेंस फोर्सेज हेडक्वार्टर के जरिए इनके बीच बेहतर तालमेल बनाने की कोशिश की गई है.

इसके अलावा कमांड को एक जगह केंद्रित करने से संकट के समय फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे. इससे सेना को कम समय में जवाबी कार्रवाई की योजना बनाने और उसे लागू करने में मदद मिल सकती है.

भारत के लिए क्या है इसका मतलब?

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के नए सैन्य ढांचे से भारत के सामने एक ज्यादा केंद्रीकृत और तेजी से फैसला लेने वाली सैन्य व्यवस्था आ सकती है. इससे सीमा पर भारत को ज्यादा सतर्क रहना पड़ सकता है.

विशेषज्ञों का मानना है कि असीम मुनीर के नेतृत्व में सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच बेहतर तालमेल से पाकिस्तान की सैन्य क्षमता बढ़ सकती है. पहले अलग-अलग सेनाओं के बीच संचार और फैसलों में लगने वाला समय इसकी बड़ी कमजोरी माना जाता था. नए सिस्टम में इसे दूर करने की कोशिश की गई है.

आर्मी रॉकेट फोर्स को भी जोड़ा गया

पाकिस्तान ने आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड को भी नए ढांचे में शामिल किया है. इसे खास तौर पर लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता के लिए तैयार किया गया है. इससे पाकिस्तान को किसी स्थानीय सैन्य कार्रवाई के जवाब में तेजी से मिसाइल या रॉकेट हमला करने की क्षमता मिल सकती है.

इस बदलाव के साथ परमाणु हथियारों से जुड़े कमांड सिस्टम को भी ज्यादा केंद्रीकृत किया गया है. नई नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड में सीडीएफ की भूमिका अहम हो गई है. भारतीय रक्षा और खुफिया विशेषज्ञों को चिंता है कि नागरिक निगरानी के कुछ स्तर कम होने से किसी बड़े संकट में परमाणु टकराव की स्थिति तेजी से पैदा हो सकती है.