Switzerland Blocks US Arms Export: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच स्विट्जरलैंड ने एक बड़ा फैसला लिया है. उसने अमेरिका को हथियारों के निर्यात पर रोक लगा दी है. इस फैसले के पीछे स्विट्जरलैंड ने अपनी पुरानी नीति का हवाला दिया है, जिसमें वह खुद को अंतरराष्ट्रीय विवादों में तटस्थ रखता है.
स्विट्जरलैंड ने साफ कहा है कि जब तक पश्चिम एशिया में संघर्ष जारी रहेगा, तब तक वह किसी भी युद्ध में शामिल देश को हथियार भेजने की अनुमति नहीं देगा. सरकार का मानना है कि ऐसे समय में हथियार भेजना उसकी तटस्थ नीति के खिलाफ होगा. इसी वजह से अमेरिका को भी फिलहाल हथियारों की आपूर्ति रोक दी गई है.
ईरान विवाद के बाद लिया गया फैसला
बताया जा रहा है कि ईरान को लेकर हालात बिगड़ने के बाद यह कदम उठाया गया है. हाल ही में ईरान पर हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है. इसी के बाद स्विट्जरलैंड ने फैसला किया कि वह ऐसे किसी भी देश को हथियार नहीं देगा, जो इस संघर्ष में शामिल है.
अमेरिका पर पड़ सकता है असर
इस फैसले का असर सीधे तौर पर अमेरिका पर पड़ सकता है. क्योंकि स्विट्जरलैंड से मिलने वाले कुछ रक्षा उपकरण और सामग्री अब उपलब्ध नहीं हो पाएंगे. हालांकि यह पूरी तरह रोक है या अस्थायी फैसला, इस पर आगे समीक्षा की जाएगी.
पहले भी ले चुका है ऐसा फैसला
यह पहली बार नहीं है जब स्विट्जरलैंड ने ऐसा कदम उठाया हो. इससे पहले इराक युद्ध 2003 के दौरान भी उसने अमेरिका को हथियारों के निर्यात पर रोक लगा दी थी. उस समय स्विट्जरलैंड ने अपने हवाई क्षेत्र से गुजरने वाली सैन्य उड़ानों पर भी रोक लगाई थी. बाद में हालात सामान्य होने पर इन प्रतिबंधों को हटा लिया गया था.
नए लाइसेंस पर लगी रोक
स्विट्जरलैंड सरकार ने कहा है कि हाल के घटनाक्रम के बाद से अमेरिका को हथियार भेजने के लिए कोई नया लाइसेंस जारी नहीं किया गया है. सरकार इस पूरे मामले की लगातार समीक्षा कर रही है और विशेषज्ञों की एक टीम इस पर नजर बनाए हुए है.
आगे क्या हो सकता है
अब स्विट्जरलैंड यह भी देख रहा है कि उसकी तटस्थता से जुड़े कानून के तहत आगे और क्या कदम उठाने चाहिए. अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो वह अपने फैसले को और सख्त भी कर सकता है. वहीं अगर स्थिति सुधरती है, तो भविष्य में इन प्रतिबंधों को हटाने पर भी विचार किया जा सकता है.
फिलहाल यह फैसला दिखाता है कि मिडिल ईस्ट में चल रहा तनाव अब दूसरे देशों के फैसलों को भी प्रभावित कर रहा है और इसका असर वैश्विक स्तर पर साफ दिखाई दे रहा है.
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