ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष अब ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंच चुका है. दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव में तेल और गैस से जुड़े बड़े ठिकाने निशाने पर हैं, जिससे पूरी दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. इस टकराव का असर कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों तक फैल गया है.
गैस और तेल ठिकाने बने निशाना
संघर्ष की शुरुआत उस समय और तेज हुई जब इजराइल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया. यह दुनिया के सबसे बड़े गैस भंडारों में से एक माना जाता है.
इसके जवाब में ईरान ने कतर, UAE और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमले किए. कतर में रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया गया, जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र है. यहां से हर साल करीब 77 से 80 मिलियन टन LNG निर्यात होता है, जो वैश्विक LNG व्यापार का लगभग 20% हिस्सा है.
UAE और सऊदी अरब में भी असर
संयुक्त अरब अमीरात में हबशान गैस प्रोसेसिंग प्लांट के संचालन पर असर पड़ा है और काम अस्थायी रूप से रोकना पड़ा. यह प्लांट UAE के गैस नेटवर्क का अहम हिस्सा है.
वहीं, सऊदी अरब ने भी पुष्टि की है कि उसके पूर्वी क्षेत्र में स्थित एक गैस संयंत्र को निशाना बनाया गया. कुछ जगहों पर मिसाइल के टुकड़े रिफाइनरी के पास गिरे, जिससे खतरे की गंभीरता साफ झलकती है.
ग्लोबल सप्लाई पर बड़ा खतरा
मिडिल ईस्ट का यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम है.
ऐसे में यहां बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के लिए चिंता का कारण बन गया है.
क्या भारत की गैस सप्लाई पर असर पड़ेगा?
इस संकट के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इसका असर भारत पर पड़ेगा. भारत की गैस जरूरतें दो स्रोतों से पूरी होती हैं- घरेलू उत्पादन और LNG इंपोर्ट. देश की लगभग आधी गैस सप्लाई घरेलू स्रोतों से आती है, जहां ONGC और Reliance Industries जैसी कंपनियां उत्पादन करती हैं.
बाकी जरूरत LNG आयात से पूरी की जाती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल घरेलू गैस (PNG) और CNG उपयोग करने वालों के लिए किसी बड़ी रुकावट की आशंका नहीं है, क्योंकि सरकार इन क्षेत्रों को प्राथमिकता देती है.
कतर पर ज्यादा निर्भरता
भारत दुनिया के बड़े LNG आयातकों में शामिल है. साल 2025 में देश ने करीब 24-25 मिलियन टन LNG आयात किया.
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कतर से आता है. भारत के आधे से ज्यादा LNG इंपोर्ट कतर के साथ लंबे समय के समझौतों पर आधारित हैं. इसके अलावा अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, रूस और अफ्रीका से भी LNG आती है, लेकिन कम मात्रा में.
होर्मुज जलडमरूमध्य की भूमिका
भारत के 50 से 55 प्रतिशत LNG आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होते हैं. मौजूदा तनाव के कारण इस मार्ग पर खतरा बना हुआ है.
हालांकि, ईरान ने भारतीय जहाजों को गुजरने की अनुमति दी है, जिससे फिलहाल सप्लाई पूरी तरह बाधित नहीं हुई है.
भारत-कतर के बीच बड़ी डील
भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कतर के साथ दीर्घकालिक समझौते भी किए हैं. फरवरी 2024 में Petronet LNG ने QatarEnergy के साथ 7.5 मिलियन टन प्रति वर्ष LNG आयात के लिए 20 साल का करार रिन्यू किया.
इस डील की कुल कीमत करीब 78 अरब डॉलर बताई जाती है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद करेगी.
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