Kaushambi Police Busts Espionage Ring: देश की सुरक्षा से जुड़ी एक बेहद गंभीर साजिश का खुलासा हुआ है. कौशांबी की पुलिस और जांच टीम ने मिलकर ऐसे गिरोह को पकड़ा है, जो देश के अहम ठिकानों की गोपनीय जानकारी विदेश तक पहुंचा रहा था. इस मामले में कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं. इस पूरे मामले की शुरुआत 14 मार्च 2026 को हुई, जब कौशांबी थाना पुलिस को एक अहम सूचना मिली.
बताया गया कि भोवापुर इलाके में रहने वाले कुछ युवक संदिग्ध गतिविधियों में लगे हुए हैं. जानकारी के मुताबिक ये लोग रेलवे स्टेशन, सुरक्षा बलों के ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों की वीडियो और तस्वीरें बनाते थे. इसके बाद ये सारी जानकारी विदेश में बैठे लोगों को भेज दी जाती थी. इतना ही नहीं, ये युवक पैसों का लालच देकर दूसरे युवाओं को भी इस काम में जोड़ रहे थे.
पुलिस ने तुरंत लिया एक्शन
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई. थाना कौशांबी में मामला दर्ज किया गया और गंभीर धाराओं में केस बनाया गया. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 5 पुरुष और 1 महिला को पकड़ लिया. जब उनके मोबाइल फोन की जांच की गई, तो उसमें कई आपत्तिजनक वीडियो और फोटो मिले.
इनमें कई ऐसी जगहों की जानकारी थी, जो देश की सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए एक खास जांच टीम बनाई गई. इस टीम में कई विभागों के अधिकारी शामिल किए गए, जिन्होंने मिलकर इस पूरे नेटवर्क की जांच शुरू की.
पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा
जब आरोपियों से पूछताछ की गई, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. पता चला कि इस गिरोह को विदेश से चलाया जा रहा था. गिरोह के मुख्य संचालक सुहैल मलिक, नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर बताए जा रहे हैं. इनके कहने पर भारत के अलग-अलग इलाकों में मौजूद लोग महत्वपूर्ण जगहों की रेकी करते थे और उनकी जानकारी विदेश भेजते थे.
और भी लोगों की हुई गिरफ्तारी
जांच आगे बढ़ी तो 20 मार्च 2026 को पुलिस ने 9 और लोगों को पकड़ लिया. इनमें 5 नाबालिग भी शामिल हैं. गिरफ्तार लोगों में गणेश, विवेक, गगन कुमार प्रजापति और दुर्गेश निषाद के नाम सामने आए हैं. इनका संबंध उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और नेपाल तक जुड़ा हुआ बताया जा रहा है.
कैसे काम करता था यह गिरोह
पूछताछ में पता चला कि आरोपी अपने मोबाइल में एक खास तरह का माध्यम इस्तेमाल करते थे, जिसके जरिए वे लोकेशन और अन्य जानकारी साझा करते थे. उन्हें यह तरीका विदेश में बैठे लोगों द्वारा सिखाया जाता था.
इसके अलावा, आरोपियों ने कुछ जगहों पर सौर ऊर्जा से चलने वाले कैमरे भी लगाए थे. ये कैमरे ऐसे स्थानों पर लगाए गए थे, जहां से लगातार निगरानी की जा सके. इन कैमरों की सीधी जानकारी भी विदेश भेजी जा रही थी. जांच में यह भी सामने आया है कि ऐसे करीब 50 और स्थानों पर कैमरे लगाने की योजना बनाई गई थी.
ओटीपी के जरिए चल रहा था खेल
गिरोह का एक और तरीका बेहद खतरनाक था. आरोपी भारतीय मोबाइल नंबरों पर आने वाले ओटीपी को विदेश भेजते थे. इससे वहां बैठे लोग इन नंबरों से सोशल मीडिया और मैसेजिंग सेवाएं चला सकते थे.
इसके बदले में आरोपी 500 से 5000 रुपये तक लेते थे. सिम कार्ड हासिल करने के लिए ये लोग अलग-अलग तरीके अपनाते थे, जैसे झपटमारी, पहले से चालू सिम खरीदना या अपने परिवार के नाम पर सिम लेना.
पैसों का लेन-देन भी था चालाकी से
पैसे लेने के लिए आरोपी सीधे अपने खाते का इस्तेमाल नहीं करते थे. वे जन सेवा केंद्र या दुकानों के जरिए पैसे मंगवाते थे और फिर नकद में लेते थे, ताकि उन पर किसी का ध्यान न जाए.
अंतरराष्ट्रीय साजिश के संकेत
जांच में यह भी पता चला कि इस गिरोह में खासतौर पर ऐसे युवाओं को जोड़ा जाता था, जिन्हें तकनीक की अच्छी जानकारी हो. जैसे मोबाइल ठीक करने वाले, कैमरा चलाने वाले या कंप्यूटर से जुड़े लोग. साथ ही उन युवाओं को निशाना बनाया जाता था, जिन्हें पैसों की ज्यादा जरूरत होती थी.
अभी भी जारी है तलाश
फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों नौशाद अली और समीर उर्फ शूटर की तलाश में जुटी हुई है. जांच एजेंसियां इस पूरे मामले के अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन को और गहराई से समझने की कोशिश कर रही हैं. यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है. आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.
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