Indus Water Treaty: सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर वैश्विक मंच पर दिखा. संयुक्त राष्ट्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान ने इस मुद्दे को उठाते हुए संधि बहाल करने की मांग की, लेकिन भारत ने साफ शब्दों में जवाब देते हुए कहा कि जब तक आतंकवाद पर लगाम नहीं लगती, तब तक इस समझौते की बहाली संभव नहीं है.
विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि के निलंबन का मुद्दा उठाया. हालांकि यह बैठक जल और स्वच्छता से जुड़े वैश्विक लक्ष्यों पर केंद्रित थी, फिर भी पाकिस्तान ने इसे अपने पक्ष में इस्तेमाल करने की कोशिश की और खुद को प्रभावित पक्ष के रूप में पेश किया.
भारत ने दिया कड़ा जवाब
भारत की ओर से संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने पाकिस्तान के दावों का जवाब देते हुए स्पष्ट कहा कि संधियों की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान जरूरी है.
उन्होंने कहा कि भारत हमेशा एक जिम्मेदार ऊपरी-तटीय देश रहा है, लेकिन जिम्मेदारी दोनों पक्षों की होती है. पाकिस्तान को अपनी नीतियों में बदलाव करते हुए आतंकवाद का समर्थन पूरी तरह खत्म करना होगा.
“आतंक बंद करो, तभी होगी बहाली”
भारत ने दो टूक कहा कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बढ़ावा देना बंद नहीं करता.
भारत का कहना है कि पिछले कई दशकों में पाकिस्तान ने न सिर्फ युद्ध थोपे, बल्कि आतंकवादी गतिविधियों के जरिए हजारों निर्दोष लोगों की जान भी ली. ऐसे में भरोसे का माहौल खत्म हो चुका है.
संधि निलंबन की वजह क्या है
भारत ने 1960 में हुई सिंधु जल संधि को हाल ही में निलंबित कर दिया था. यह कदम पहलगाम हमले के बाद उठाया गया, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान से जुड़े आतंकी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी.
इस हमले के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए जवाब दिया और संधि को रोकने का फैसला लिया.
बदलाव पर भी पाकिस्तान नहीं हुआ तैयार
भारत ने यह भी बताया कि पिछले 65 वर्षों में तकनीक, जनसंख्या और पर्यावरण में बड़े बदलाव हुए हैं, जिसके चलते इस संधि में संशोधन की जरूरत थी.
लेकिन भारत के कई प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान ने किसी भी तरह की बातचीत या बदलाव पर सहमति नहीं दिखाई.
भारत का जल मिशन और वैश्विक संदेश
इस मौके पर भारत ने अपने जल प्रबंधन प्रयासों को भी सामने रखा. सरकार के ‘जल जीवन मिशन’ के तहत देश के ग्रामीण इलाकों में बड़े स्तर पर पाइप से पानी पहुंचाया जा रहा है.
2019 में शुरू हुए इस मिशन के तहत अब तक 80% से ज्यादा ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया जा चुका है.
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