Iran US Talk: पाकिस्तान में इन दिनों अंतरराष्ट्रीय गतिविधियां अचानक तेज हो गई हैं. खबरें सामने आ रही हैं कि अमेरिका के कई विमान लगातार इस्लामाबाद पहुंच रहे हैं. बताया जा रहा है कि अब तक करीब छह विमान वहां उतर चुके हैं, जिनमें राजनयिक, तकनीकी विशेषज्ञ, सुरक्षा अधिकारी और गुप्त सेवा से जुड़े लोग सवार थे. इन घटनाओं ने पूरे इलाके में हलचल बढ़ा दी है और सबकी नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि आगे क्या होने वाला है.
इस बढ़ती गतिविधि के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत मानी जा रही है. पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिका के बड़े प्रतिनिधि इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसके बावजूद यह साफ है कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी कूटनीतिक तैयारी चल रही है.
ईरान को मनाने की कोशिश
पाकिस्तान लगातार ईरान के संपर्क में बना हुआ है और उसे बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहा है. इसी सिलसिले में पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने इस्लामाबाद में ईरान के राजदूत डॉ. रजा अमीरी मोघदम से मुलाकात की. इस मुलाकात में बातचीत के अगले दौर की तैयारियों और क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा हुई. पाकिस्तान ने यह भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि अगर बातचीत होती है, तो वह पूरी तरह सुरक्षित माहौल में कराई जाएगी.
सुरक्षा और तैयारियों पर जोर
इस बैठक में सुरक्षा व्यवस्था पर खास ध्यान दिया गया. पाकिस्तान ने साफ कहा है कि सभी जरूरी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और विदेशी मेहमानों की सुरक्षा के लिए मजबूत इंतजाम किए गए हैं. वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी यह दिखाती है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से ले रहा है और किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता.
ईरान ने अभी नहीं लिया फैसला
दूसरी तरफ ईरान ने अब तक कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने साफ कहा कि अभी तक इस्लामाबाद में होने वाली बातचीत के अगले दौर में शामिल होने को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है. उनका कहना है कि ईरान हर कदम अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर ही उठाएगा.
अमेरिका पर भरोसा क्यों नहीं
ईरान का अमेरिका पर भरोसा काफी कमजोर हो चुका है. ईरान का कहना है कि अमेरिका की बात और उसके काम में फर्क है. युद्धविराम के बाद भी ईरान को अमेरिका की ओर से दबाव और विरोध का सामना करना पड़ा है. ईरान के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य में उसकी गतिविधियों को रोका गया और उसके जहाजों पर कार्रवाई की गई, जिसे वह समझौते का उल्लंघन मानता है.
बातचीत में अटके बड़े मुद्दे
दोनों देशों के बीच कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सहमति बनना आसान नहीं है. परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय तनाव, अलग-अलग संगठनों का समर्थन, आर्थिक प्रतिबंध और युद्ध के नुकसान जैसे कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं. यही वजह है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही कई अड़चनें सामने आ रही हैं.
दो मुख्य वजहों से रुकी बात
असल में दो बड़े मुद्दे ऐसे हैं, जिनकी वजह से मामला सबसे ज्यादा अटका हुआ है. पहला है यूरेनियम संवर्धन का मुद्दा. अमेरिका चाहता है कि ईरान इस पर नियंत्रण छोड़ दे, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि वह ऐसा नहीं करेगा. वह सिर्फ इतना भरोसा देने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और जांच की अनुमति देगा.
दूसरा बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी का है. ईरान ने हाल ही में रास्ता खोलने की बात कही थी, लेकिन अमेरिका ने साफ कर दिया कि जब तक स्थायी समझौता नहीं होता, नाकेबंदी जारी रहेगी. इसी बात से ईरान नाराज है और इसे अमेरिका की दोहरी नीति मानता है.
आगे की राह क्या होगी
फिलहाल स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. पाकिस्तान लगातार कोशिश कर रहा है कि बातचीत शुरू हो सके, लेकिन ईरान अभी सोच-विचार में है और अमेरिका अपनी शर्तों पर कायम है. ऐसे में आने वाले दिनों में ही तय होगा कि बातचीत आगे बढ़ेगी या तनाव और बढ़ेगा.
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