India Heatwave: भारत में जलवायु संकट का असर अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है. एक नई रिसर्च के मुताबिक, आने वाले समय में देश को और ज्यादा खतरनाक गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. अभी तक जो गर्मी बढ़ी है, वह असली तस्वीर का सिर्फ एक हिस्सा है.
अब तक कम क्यों बढ़ी गर्मी
रिपोर्ट के अनुसार, 1980-90 से लेकर 2015-24 के बीच भारत की जमीन का तापमान करीब 0.88 डिग्री सेल्सियस बढ़ा है. जबकि पूरी दुनिया में यह बढ़ोतरी औसतन 1.4 डिग्री सेल्सियस रही है. यानी भारत में अभी तक गर्मी का असर थोड़ा कम दिखा है.
इस रिसर्च को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सलाता इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट एंड सस्टेनेबिलिटी ने जारी किया है. इसमें कहा गया है कि भारत में अभी जो चीजें गर्मी को कम कर रही हैं, वे हमेशा काम नहीं करेंगी. इसलिए आगे की तैयारी करते समय इस फर्क को समझना जरूरी है.
उत्तर भारत में कम गर्मी की वजह
रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान दिन का तापमान देश के औसत से कम बढ़ रहा है. कुछ जगहों पर जनवरी में ठंड बढ़ने का रुझान भी देखा गया है. अक्टूबर से दिसंबर तक भी यहां तापमान में उतनी तेजी से बढ़ोतरी नहीं होती जितनी बाकी जगहों पर होती है.
इसके पीछे दो बड़े कारण बताए गए हैं, वायु प्रदूषण और ज्यादा सिंचाई. हवा में मौजूद धूल और धुएं के छोटे कण (एरोसोल) सूरज की किरणों को रोकते या फैला देते हैं, जिससे जमीन तक कम गर्मी पहुंचती है. वहीं खेतों में ज्यादा सिंचाई होने से पानी का वाष्प बनना भी ठंडक पैदा करता है.
साफ हवा से बढ़ सकती है गर्मी
सरकार की योजनाएं जैसे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम वायु प्रदूषण को कम करने पर काम कर रही हैं. इससे लोगों की सेहत तो बेहतर होगी, लेकिन एक असर यह भी होगा कि जो प्रदूषण अभी तक गर्मी को थोड़ा कम कर रहा है, वह कम हो जाएगा. इसका मतलब है कि आने वाले समय में खासकर उत्तर भारत में सर्दियों के दिनों का तापमान और बढ़ सकता है.
भविष्य के लिए चेतावनी
रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक जो पुराने आंकड़ों के आधार पर योजनाएं बनाई जा रही हैं, वे आगे चलकर सही साबित नहीं हो सकतीं. जैसे हीट एक्शन प्लान, खेती की तैयारी, मजदूरों की सुरक्षा और आर्थिक योजनाएं, इन सबमें भविष्य की असली गर्मी को ध्यान में रखना जरूरी है.
काम करने वाले लोगों पर बढ़ेगा खतरा
भारत में करीब 75% कामकाजी लोग ऐसे हैं जो बाहर गर्मी में काम करते हैं. इनकी संख्या लगभग 38 करोड़ है. इसमें खेती, निर्माण और छोटे-मोटे काम शामिल हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हैं.
रिपोर्ट से जुड़े विशेषज्ञ सच्चित बलसरी के अनुसार, आने वाले समय में इन लोगों के लिए खतरा और बढ़ सकता है. अनुमान है कि 2030 तक करीब 20 करोड़ लोग बहुत ज्यादा गर्मी का सामना करेंगे.
गर्मी से बचने के सीमित साधन
भारत में अभी भी बहुत कम लोगों के पास एयर कंडीशनर है. केवल करीब 8% घरों में ही AC है. बाकी लोग पंखा, कूलर या दूसरे सीमित तरीकों से गर्मी से राहत पाने की कोशिश करते हैं, जो कई बार पर्याप्त नहीं होते.
बारिश में भी बड़ा बदलाव संभव
कुछ जलवायु मॉडल बताते हैं कि सदी के अंत तक भारत में सालाना बारिश 20% से ज्यादा बढ़ सकती है. कुछ अनुमान तो 60% तक बढ़ोतरी की बात भी करते हैं. इसका सीधा असर किसानों पर पड़ेगा, क्योंकि उन्हें बदलते मौसम के अनुसार खेती के तरीके बदलने पड़ेंगे. साथ ही, साल-दर-साल बारिश में उतार-चढ़ाव भी बढ़ सकता है.
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