मणिपुर हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, CBI-NIA मामलों के लिए अलग कोर्ट बनाने का किया अनुरोध

मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे मणिपुर हिंसा से जुड़े उन मामलों के लिए अलग कोर्ट बनाने पर विचार करें जिनकी जांच CBI और NIA कर रही हैं.

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मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध किया कि वे मणिपुर हिंसा से जुड़े उन मामलों के लिए अलग कोर्ट बनाने पर विचार करें जिनकी जांच CBI और NIA कर रही हैं. CJI सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने यह अनुरोध तब किया जब वे मणिपुर संकट के दौरान हुई यौन हिंसा की घटनाओं की जांच और ट्रायल से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे थे.

891 की गवाही अभी बाकी

सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही इन मामलों के ट्रायल को मणिपुर से असम (गुवाहाटी हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में) ट्रांसफर कर दिया था. सोमवार को दायर स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि CBI के मामलों में अभी भी बड़ी संख्या में गवाहों से पूछताछ होनी बाकी है और कहा कि डेडिकेटेड कोर्ट से ट्रायल तेज़ी से हो सकते हैं. CBI की स्टेटस रिपोर्ट से पता चला कि कई मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी हैं और कुल 904 गवाहों का ज़िक्र किया गया है. इनमें से 891 गवाहों से अभी पूछताछ होनी बाकी है.

CBI-NIA मामलों के लिए डेडिकेटेड कोर्ट का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन गवाहों से पूछताछ होनी है, उनकी कुल संख्या को देखते हुए हम गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध करते हैं कि वे CBI या NIA कोर्ट को सिर्फ़ मणिपुर से जुड़े मामलों को देखने की अनुमति देने की संभावना पर विचार करें. 

अलग CBI और NIA स्पेशल कोर्ट बनाने का प्रस्ताव

दूसरे मामलों को किसी और कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि चीफ जस्टिस दो अलग-अलग स्पेशल कोर्ट बनाने पर भी विचार कर सकते हैं - एक CBI मामलों के लिए और दूसरा NIA मामलों के लिए. सुप्रीम कोर्ट ने गुवाहाटी हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को इस प्रस्ताव की संभावना के बारे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया.

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