नई दिल्ली: लाल सागर में बढ़ते खतरे के बीच भारत ने अपने समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाया है. भारतीय नौसेना ने भारत से जुड़े दो तेल टैंकरों को सुरक्षित एस्कॉर्ट करके खतरनाक इलाके से बाहर निकाला. हाल ही में भारतीय झंडे वाले एक जहाज पर हमला हुआ था और वह डूब गया था. इसके बाद नौसेना ने हाई-रिस्क जोन में सीधे ऑपरेशन शुरू कर दिए.
यमन के पास भारतीय जहाज पर हुए हमले के बाद स्थिति और गंभीर हो गई. इस घटना के बाद भारतीय नौसेना ने बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में सक्रिय होकर दो क्रूड ऑयल टैंकर MT Compass और MT Thalatta को सुरक्षित रास्ता दिया. यह ऑपरेशन 9 और 10 अगस्त को INS त्रिशूल और INS आदित्य की निगरानी में पूरा किया गया.
क्यों महत्वपूर्ण है बाब-अल-मंदेब?
बाब-अल-मंदेब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है. जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा, तो कई तेल टैंकरों ने लाल सागर के रास्ते का इस्तेमाल शुरू किया. लेकिन अब यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के कारण यह रास्ता भी जोखिम भरा हो गया है. इससे दुनिया के दो बड़े तेल मार्ग होर्मुज और बाब-अल-मंदेब दोनों ही अस्थिर माने जा रहे हैं.
🇮🇳⚓#INSTrishul and #INSAditya escorted crude tankers MT Compass and MT Thalatta to safely transit the high-risk area through #BabelMandeb strait on 9 and 10 Aug 2026.#IndianNavy remains committed to securing the safe transit of vital energy cargo and protecting Indian… pic.twitter.com/U2CCXmvh3W
— Western Naval Command (@IN_WNC) August 10, 2026
हूती विद्रोहियों से बढ़ा खतरा
यमन के हूती विद्रोही लगातार जहाजों को निशाना बना रहे हैं. हालिया हमले में एक भारतीय झंडे वाला जहाज डूब गया, हालांकि उसमें सवार सभी 14 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया. यमन की मान्यता प्राप्त सरकार ने इस हमले के लिए हूतियों को जिम्मेदार बताया है, हालांकि हूती समूह ने इसकी आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं ली है.
भारत ने क्यों उठाया यह कदम?
भारतीय जहाज पर हमले के बाद भारत ने फैसला किया कि अब अपने जहाजों और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा के लिए खुद सक्रिय होना होगा. पहले समुद्री सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और दूसरे देशों की मौजूदगी पर भरोसा किया जाता था, लेकिन मौजूदा हालात में भारत ने सीधे एस्कॉर्ट ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं.
भारतीय नौसेना का यह कदम साफ संकेत देता है कि भारत अब अपने समुद्री व्यापार, तेल आपूर्ति और रणनीतिक हितों की रक्षा के लिए लाल सागर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
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