नई दिल्ली: भारतीय सेना भविष्य में होने वाले हाइब्रिड युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए अपनी तैयारी तेजी से मजबूत कर रही है. रक्षा मंत्रालय ने संसद की रक्षा मामलों की स्थायी समिति को बताया है कि सेना अब पारंपरिक हथियारों के साथ साइबर, इलेक्ट्रॉनिक और सूचना युद्ध जैसी नई तकनीकी क्षमताओं को भी तेजी से शामिल कर रही है. भारतीय वायु सेना (IAF) भी नए एडवांस्ड हथियारों और आधुनिक तकनीकों से लैस होने की दिशा में आगे बढ़ रही है.
संसद में पेश की गई समिति की रिपोर्ट के अनुसार, सेना इन्फैंट्री, मैकेनाइज्ड फोर्स, आर्टिलरी और एविएशन सिस्टम के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है. इससे अलग-अलग तरह के युद्ध और भौगोलिक परिस्थितियों में सेना की प्रतिक्रिया और हमला करने की क्षमता मजबूत होगी.
ISR और लंबी दूरी तक हमला करने की क्षमता
सेना अपनी इंटेलिजेंस, सर्विलांस और टोही यानी ISR क्षमता को भी मजबूत कर रही है. इसके साथ लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियारों पर भी काम किया जा रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि आधुनिक युद्ध में सही जानकारी और सही लक्ष्य पर तेज कार्रवाई सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है.
ड्रोन से निपटने के लिए नई तकनीक
ड्रोन से बढ़ते खतरे को देखते हुए सेना डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों को भी अपनी ताकत का हिस्सा बना रही है. इसके अलावा सभी सैन्य फॉर्मेशन में काउंटर-ड्रोन सिस्टम लगाए जा रहे हैं, ताकि एक मजबूत और एकीकृत काउंटर-ड्रोन ग्रिड तैयार किया जा सके.
नए इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल बनाना है, जिससे जरूरत पड़ने पर सैनिकों और हथियारों की तेजी से तैनाती की जा सके.
साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर भी जोर
सेना ने साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सूचना अभियान और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम मैनेजमेंट जैसी क्षमताओं का भी विस्तार किया है. खास साइबर यूनिट्स महत्वपूर्ण नेटवर्क की सुरक्षा और साइबर ऑपरेशन पर काम कर रही हैं. वहीं इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यूनिट्स को आधुनिक सिस्टम से लैस किया जा रहा है, ताकि वे दुश्मन पर तकनीकी बढ़त बना सकें.
IAF के बड़े कार्यक्रम आगे बढ़ रहे हैं
भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण को लेकर भी रक्षा मंत्रालय ने कई अहम जानकारी दी है. इस वित्त वर्ष में कई बड़े रक्षा कार्यक्रम आगे बढ़ रहे हैं. इनमें लड़ाकू विमान, सर्विलांस एयरक्राफ्ट, लंबे समय तक उड़ान भरने वाले ड्रोन, मिसाइल सिस्टम और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की खरीद और अपग्रेड शामिल हैं.
सरकार का कहना है कि IAF को दिए गए बजट का उपयोग पुराने प्रोजेक्ट पूरे करने और नई योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाने में किया जाएगा.
114 नए लड़ाकू विमान खरीदने की योजना
वायु सेना में लड़ाकू विमानों की कमी को दूर करने के लिए MRFA (मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम पर भी काम जारी है. इसके तहत 114 नए लड़ाकू विमान खरीदने की योजना है. फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन ने एक भारतीय कंपनी के साथ मिलकर भारत में राफेल लड़ाकू विमान बनाने का प्रस्ताव भी दिया है.
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, IAF उन क्षेत्रों में सरकारी और निजी कंपनियों के साथ लगातार काम कर रही है, जहां देश में अभी पर्याप्त तकनीकी क्षमता उपलब्ध नहीं है. इसका उद्देश्य नई तकनीक अपनाने के साथ-साथ भविष्य की सैन्य जरूरतों के लिए भारत की अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करना है.
सेना और वायु सेना की ये तैयारियां दिखाती हैं कि आने वाले समय में युद्ध सिर्फ पारंपरिक हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, साइबर क्षमता और आधुनिक रक्षा प्रणालियों के दम पर भी लड़े जाएंगे.
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