FCRA Bill: 12 अगस्त को अमित शाह पेश कर सकते हैं FCRA बिल, परिसीमन पर क्या है मोदी सरकार की रणनीति?

केंद्र सरकार 12 अगस्त 2026 को संसद में एफसीआरए (फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन) संशोधन बिल पेश कर सकती है.

Amit Shah likely to table the FCRA Bill on August 12 strategy regarding delimitation
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FCRA Bill: केंद्र सरकार 12 अगस्त 2026 को संसद में एफसीआरए (फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन) संशोधन बिल पेश कर सकती है. जानकारी के मुताबिक यह बिल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह लोकसभा में पेश कर सकते हैं. मानसून सत्र के दौरान विपक्ष लगातार अमित शाह की गैरमौजूदगी का मुद्दा उठाता रहा है और इसी वजह से कई बार संसद की कार्यवाही प्रभावित हुई.

पहले यह माना जा रहा था कि सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़े बिल को प्राथमिकता दे सकती है. लेकिन अब खबर है कि सरकार पहले एफसीआरए संशोधन बिल को आगे बढ़ाना चाहती है.

सरकार की पहली प्राथमिकता FCRA बिल

हाल ही में मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा और कुछ ईसाई संगठनों ने प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन बिल को लेकर अमित शाह से मुलाकात की थी. उस समय भी संकेत मिले थे कि यह बिल 12 अगस्त को संसद में लाया जा सकता है.

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त तक चलने वाला है. ऐसे में सरकार चाहती है कि इस सत्र के दौरान ही एफसीआरए संशोधन बिल को पारित कराया जाए. इस बिल को पास कराने के लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है.

सरकारी सूत्रों का कहना है कि यह बिल देशहित में जरूरी है. सरकार सभी पक्षों की चिंताओं पर बात करने को तैयार है, लेकिन दबाव में आकर फैसला नहीं करेगी. यह विधेयक मार्च 2025 से संसद में लंबित है.

परिसीमन पर सरकार की नई योजना

परिसीमन का मामला संविधान संशोधन से जुड़ा है, इसलिए इसे पास कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा दोनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है. सरकार अप्रैल 2026 में इसे पास कराने की कोशिश कर चुकी थी, लेकिन सफल नहीं हो पाई.

उस प्रस्ताव में लोकसभा की अधिकतम सीटें 850 तक बढ़ाने की बात थी. साथ ही राज्यों के बीच सीटों के बंटवारे के लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने का प्रस्ताव रखा गया था. सरकार ने यह भी कहा था कि हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा सीटों में कम से कम 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाएगी.

2027 की जनगणना के बाद बदल सकती है स्थिति

संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 के अनुसार, 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े जारी होने पर परिसीमन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.

इसका मतलब है कि यदि संविधान संशोधन नहीं होता, तो 2027 की जनगणना के आंकड़े आने के बाद परिसीमन का रास्ता अपने आप खुल सकता है. ऐसे में अलग से संविधान संशोधन की जरूरत नहीं पड़ेगी. 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लगभग दो साल का समय मिलेगा, जिसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने की प्रक्रिया भी पूरी की जा सकती है.

दक्षिणी राज्यों को लेकर सरकार का संदेश

सूत्रों के मुताबिक सरकार दक्षिण भारत के राज्यों को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि यदि जनगणना के बाद सामान्य संवैधानिक प्रक्रिया के तहत परिसीमन हुआ, तो उन्हें सीटों के मामले में नुकसान हो सकता है.

दक्षिणी राज्यों की चिंता लंबे समय से यही रही है कि उनकी जनसंख्या वृद्धि अपेक्षाकृत कम रही है, इसलिए नए परिसीमन में उनकी सीटों का अनुपात घट सकता है. सरकार का तर्क है कि यदि संविधान संशोधन के जरिए पहले से कम से कम 50 प्रतिशत सीट बढ़ाने की गारंटी मिलती है, तो यह उनके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.

सूत्रों का कहना है कि यदि दक्षिणी राज्यों की पार्टियां इस प्रस्ताव पर सहमत होती हैं, तो आने वाले महीनों में सरकार परिसीमन पर चर्चा और विधेयक के लिए संसद का विशेष सत्र भी बुला सकती है.