'पीएम मोदी के जन्मदिन पर ट्रंप को...' शशि थरूर ने अमेरिका को दिए भारत के साथ रिश्ते बचाने के 4 टिप्स

भारत और अमेरिका के रिश्तों पर एक नया संकट मंडरा रहा है और इसकी वजह है अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ (शुल्क).

Shashi Tharoor gives tips to America to save relations with India
प्रतिकात्मक तस्वीर/ ANI

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के रिश्तों पर एक नया संकट मंडरा रहा है और इसकी वजह है अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए कड़े टैरिफ (शुल्क). इन टैरिफों को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर अमेरिका ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया, तो वह भारत को खो सकता है, और इसका असर केवल विदेश नीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिका की आंतरिक राजनीति पर भी गहरा प्रभाव डालेगा.

शशि थरूर ने अपने विचार इंडियन एक्सप्रेस में लिखे एक लेख के माध्यम से रखे हैं. उन्होंने अमेरिकी नेतृत्व को चार ठोस सुझाव दिए हैं ताकि भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी को टूटने से बचाया जा सके. थरूर का मानना है कि भारत एक ऐसा साझेदार है, जिसे अमेरिका लंबे समय से तैयार कर रहा है और जिसे खो देना एक ऐतिहासिक भूल साबित हो सकती है.

भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी

शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले 25 वर्षों में जो रणनीतिक साझेदारी विकसित हुई है, वह एक सामान्य व्यापारिक संबंध नहीं बल्कि भविष्य की वैश्विक स्थिरता की नींव है. भारत और अमेरिका न केवल आर्थिक, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, ऊर्जा और वैश्विक कूटनीति में भी गहरे सहयोगी रहे हैं.

लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से भारत पर 25% दंडात्मक टैरिफ लगाए जाने ने इस रिश्ते में दरार डाल दी है. थरूर का कहना है कि अमेरिका भारत को इस तरह दंडित कर रहा है मानो वह कोई विरोधी देश हो, जबकि भारत ने तेल और रक्षा उपकरणों की खरीद में आत्मनिर्भरता लाने के लिए अपने विकल्प खोजे हैं.

भारत रूस-चीन के करीब जा सकता है?

थरूर ने चेताया है कि अगर अमेरिका ने अपनी नीति में सुधार नहीं किया, तो भारत रूस और चीन जैसे देशों के साथ गंभीर रणनीतिक साझेदारी कर सकता है. यह बदलाव न केवल अमेरिका के लिए भूराजनीतिक नुकसान होगा, बल्कि आने वाले वर्षों में अमेरिकी राजनीति में यह सवाल उठेगा कि भारत को खोने की जिम्मेदारी किसकी थी?

उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज जो कूटनीतिक गड़बड़ी हो रही है, वह कल अमेरिका के लिए नीतिगत असफलता का प्रतीक बन सकती है.

शशि थरूर के चार अहम सुझाव-

1. दंडात्मक टैरिफ को तुरंत हटाए अमेरिका

थरूर का पहला और सबसे महत्वपूर्ण सुझाव है कि अमेरिका को 25% का दंडात्मक टैरिफ तुरंत हटाना चाहिए, खासकर उन क्षेत्रों में जहां इसका सीधा असर भारत के श्रमिकों और छोटे उद्योगों पर पड़ रहा है. ये वही सेक्टर हैं जो पहले से ही बेसलाइन टैरिफ का दबाव झेल रहे थे. अमेरिका का यह कदम न केवल सकारात्मक संकेत देगा, बल्कि दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों को नई ऊर्जा भी देगा.

2. मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता में तेजी लाएं

दूसरा सुझाव है कि अमेरिका को भारत के साथ Free Trade Agreement (FTA) पर प्रगति करनी चाहिए. थरूर के मुताबिक, अमेरिका को चाहिए कि वह भारत को एक व्यावहारिक विकल्प दे- ऐसा विकल्प जो उसे चीन या अन्य एशियाई प्रतिस्पर्धियों पर निर्भर न रहने दे. अगर अमेरिका ऐसा करता है, तो भारत का टैरिफ भी एशिया के अन्य देशों जैसे 15-19% के स्तर पर आ सकता है, जिससे व्यापार संतुलन बेहतर होगा.

3. डोनाल्ड ट्रंप को व्यक्तिगत पहल करनी चाहिए

थरूर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह भी सुझाव दिया कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बात करनी चाहिए. यह व्यक्तिगत संवाद रिश्तों में जमी बर्फ को पिघला सकता है. थरूर ने कहा कि मोदी का जन्मदिन एक अच्छा मौका हो सकता है जब ट्रंप उन्हें बधाई देकर रिश्तों में फिर से गर्मजोशी ला सकते हैं. साथ ही, संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान भी दोनों नेताओं को मिलकर रचनात्मक बातचीत करनी चाहिए.

4. तकनीक और डिफेंस सेक्टर में सहयोग बढ़ाएं

थरूर का चौथा और आखिरी सुझाव है कि अमेरिका को भारत के साथ टेक्नोलॉजी और डिफेंस सेक्टर में अपना सहयोग और ज्यादा गहरा और दीर्घकालिक बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका को भारत को "जब ज़रूरत हो तभी साझेदार" की तरह नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसे एक स्थायी और भरोसेमंद रणनीतिक मित्र की तरह ट्रीट करना चाहिए.

अमेरिका को हो सकता है भारी नुकसान

शशि थरूर की चेतावनी केवल भारत के दृष्टिकोण से नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी हितों को भी सीधा संबोधित करती है. उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका अपनी वर्तमान नीति पर कायम रहा, तो वह न केवल भारत को रणनीतिक रूप से खो सकता है, बल्कि यह उसके वैश्विक नेतृत्व की साख के लिए भी बड़ा झटका होगा.

आज जब दुनिया भूराजनीतिक तनावों, ऊर्जा संकट, और वैश्विक व्यापार युद्धों से गुजर रही है, ऐसे में भारत जैसे स्थिर और तेजी से उभरते देश के साथ संबंधों को कमजोर करना अमेरिका के लिए दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन सकता है.

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