होर्मुज संकट पर सरकार अलर्ट, पीएम मोदी ने मंत्रियों संग की हाईलेवल बैठक, क्या है भारत का प्लान?

पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता ने उन देशों को ज्यादा सतर्क कर दिया है, जिनकी ऊर्जा जरूरतें समुद्री व्यापार पर निर्भर हैं.

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते भू-राजनीतिक हालात ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी अनिश्चितता ने उन देशों को ज्यादा सतर्क कर दिया है, जिनकी ऊर्जा जरूरतें समुद्री व्यापार पर निर्भर हैं. भारत भी इस चुनौती को गंभीरता से लेते हुए पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वरिष्ठ मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर ऊर्जा सुरक्षा, खाद की उपलब्धता, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव जैसे अहम मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की.

भारतीय नागरिकों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि दुनिया के किसी भी हिस्से में कार्यरत भारतीय नागरिकों, विशेष रूप से नाविकों की सुरक्षा सरकार की पहली जिम्मेदारी है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चाहे भारतीय नाविक किसी भारतीय जहाज पर तैनात हों या विदेशी जहाज पर, जरूरत पड़ने पर उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए. सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि विदेशों में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा से जुड़ी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और किसी भी आपात परिस्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

ऊर्जा आपूर्ति मजबूत रखने के लिए तैयार की गई रणनीति

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है. ऐसे में संभावित व्यवधान को देखते हुए प्रधानमंत्री ने पेट्रोलियम मंत्रालय की तैयारियों की समीक्षा की. बैठक में ऊर्जा स्रोतों को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाने पर जोर दिया गया. साथ ही देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की रणनीति पर भी चर्चा हुई, ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट का असर घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर न्यूनतम रहे.

किसानों और अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने पर विशेष फोकस

बैठक में कृषि क्षेत्र को लेकर भी व्यापक समीक्षा की गई. प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाली रबी फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और 2027 की खरीफ फसल को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त खाद भंडारण की प्रक्रिया भी जारी है. इसके साथ ही होर्मुज संकट का निर्यात और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव का आकलन किया गया. सरकार ने संकेत दिए कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण होती हैं तो व्यापार और निर्यातकों के हितों की रक्षा के लिए समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.

वैश्विक हालात पर लगातार नजर

केंद्र सरकार का कहना है कि पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है और ऊर्जा, कृषि, व्यापार तथा नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े हर पहलू की नियमित समीक्षा की जा रही है. प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसी भी संभावित संकट का असर आम लोगों, किसानों और उद्योगों पर न पड़े, इसके लिए पहले से ही ठोस रणनीति तैयार रखी जाए. सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय हालात चाहे जैसे भी हों, देश की आवश्यक आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और नागरिकों की सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित बनी रहे.

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