Pakistan US Drone: भारत के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी सेना को तेजी से आधुनिक बनाने में जुटा है. इसी कड़ी में उसकी ड्रोन वॉरफेयर की तैयारी भी सामने आ रही है. अमेरिकी ड्रोन कंपनी Powerus ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन किया है. इस समझौते में ड्रोन से जुड़ा शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है. हालांकि, कितने ड्रोन खरीदे जाएंगे और डील की कुल रकम कितनी है, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है.
पाकिस्तान के डिफेंस सेक्टर में अब तक चीन और तुर्की की कंपनियों का काफी प्रभाव रहा है. ऐसे में अमेरिकी कंपनी के साथ यह समझौता उसके रक्षा सहयोग में एक बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है. Powerus सेना और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए हवाई और समुद्री ड्रोन बनाती है. कंपनी पाकिस्तान में तकनीक विकसित करने और स्थानीय स्तर पर काम करने की संभावनाएं भी तलाश रही है.
Powerus जल्द ही Aureus Greenway Holdings के साथ विलय करने वाली है. इस कंपनी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप की निवेश के जरिए हिस्सेदारी है. अमेरिकी नियामकीय दस्तावेजों के मुताबिक, विलय के बाद American Ventures की नई कंपनी में करीब 9.9 प्रतिशत हिस्सेदारी हो सकती है.
ऑपरेशन सिंदूर का खौफ
पाकिस्तान की नई ड्रोन तैयारी को ऑपरेशन सिंदूर के बाद बदली सैन्य रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. भारतीय अधिकारियों और रिपोर्टों के मुताबिक, मई 2025 के सैन्य अभियान में पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था. भारत सरकार के मुताबिक, कुछ ही घंटों में नूर खान, सरगोधा, भोलारी समेत 11 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था.
भारत ने खोली पाकिस्तानी डिफेंस की पोल
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के कई एयरबेस और सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों ने उसकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए. इसके बाद पाकिस्तान की ओर से ड्रोन और बिना पायलट वाले हवाई सिस्टम पर ज्यादा जोर दिए जाने की बात सामने आई है.
अब पाकिस्तान अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर ड्रोन तकनीक और उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. Powerus ने भी पाकिस्तान में तकनीक विकसित करने और स्थानीय स्तर पर उत्पादन की संभावनाओं की बात कही है. ऐसे में यह समझौता पाकिस्तान की ड्रोन क्षमता बढ़ाने की उसकी कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है.
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