US-Iran War: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के दौरान पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संघर्ष के समय पाकिस्तान ने कथित तौर पर ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर उतरने की अनुमति दी थी, ताकि उन्हें संभावित अमेरिकी हमलों से सुरक्षित रखा जा सके. इस दावे के सामने आने के बाद पाकिस्तान की निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका पर बहस तेज हो गई है.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच संवाद स्थापित करने वाले एक मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा था. अब इस कथित सहयोग को लेकर पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर सवाल उठाए जा रहे हैं.
अमेरिकी रिपोर्ट में क्या दावा किया गया?
अमेरिकी मीडिया नेटवर्क CBS News ने कुछ अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि ईरान ने संघर्ष के दौरान अपने कुछ सैन्य विमान पाकिस्तान भेजे थे. रिपोर्ट में कहा गया कि इन विमानों को रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तानी वायुसेना के नूर खान एयरबेस पर रखा गया था.
अधिकारियों के अनुसार, यह कदम अमेरिकी हमलों के खतरे को देखते हुए उठाया गया था ताकि ईरान अपने महत्वपूर्ण सैन्य विमानों और उपकरणों को सुरक्षित रख सके. रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान की सैन्य और सरकारी एजेंसियों ने इसके लिए कथित तौर पर अनुमति दी थी.
ट्रंप के करीबी नेता ने उठाए सवाल
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी सीनेटर और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी माने जाने वाले लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की भूमिका पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अगर ये दावे सही साबित होते हैं तो अमेरिका को पाकिस्तान की मध्यस्थ की भूमिका पर फिर से विचार करना पड़ेगा.
ग्राहम ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के कुछ रक्षा अधिकारियों के पहले दिए गए बयानों को देखते हुए इस तरह की खबरें चौंकाने वाली नहीं हैं. उन्होंने मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि अमेरिका को पूरी स्थिति का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए.
किन विमानों के पाकिस्तान पहुंचने का दावा?
रिपोर्ट में कहा गया कि अप्रैल की शुरुआत में ईरान ने कई सैन्य विमान और अन्य सैन्य संसाधन पाकिस्तान भेजे थे. इनमें कथित तौर पर ईरानी वायुसेना का RC-130 टोही विमान भी शामिल था. यह विमान लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस का विशेष निगरानी संस्करण माना जाता है.
बताया गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अस्थायी युद्धविराम की घोषणा के बाद यह गतिविधि हुई. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तनाव बढ़ने के दौरान ईरान ने अपने कुछ महत्वपूर्ण सैन्य संसाधनों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की कोशिश की थी.
पाकिस्तान ने आरोपों को किया खारिज
हालांकि पाकिस्तान की ओर से इन दावों को पूरी तरह नकार दिया गया है. एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने CBS News से बातचीत में कहा कि नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले इलाके में स्थित है और वहां इतनी बड़ी सैन्य गतिविधि को छिपाना संभव नहीं है.
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है और पाकिस्तान ने ऐसी किसी गतिविधि की अनुमति नहीं दी.
अफगानिस्तान का भी आया जिक्र
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ईरान ने अपने कुछ नागरिक विमानों को अफगानिस्तान भेजा था. इस पर अफगानिस्तान के नागरिक उड्डयन विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि युद्ध शुरू होने से पहले ‘महान एयर’ का एक विमान काबुल पहुंचा था.
अधिकारी के अनुसार, संघर्ष के कारण ईरानी हवाई क्षेत्र बंद हो गया था, जिसकी वजह से विमान कुछ दिनों तक काबुल में रुका रहा. बाद में उसे हेरात एयरपोर्ट भेज दिया गया.
तालिबान ने क्या कहा?
तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने अफगानिस्तान में ईरानी विमानों की मौजूदगी को लेकर चल रही खबरों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि ईरान को अपने विमानों को अफगानिस्तान भेजने की जरूरत नहीं थी.
मुजाहिद के मुताबिक, किसी ईरानी विमान का कुछ समय के लिए काबुल में रुकना केवल एक सामान्य परिस्थिति थी और इसे किसी सैन्य रणनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए.
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