Hantavirus: कोविड महामारी के बाद दुनिया एक बार फिर नए वायरस के खतरे को लेकर सतर्क हो गई है. इस बार चिंता का कारण बना है हंता वायरस, जिसने हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. अटलांटिक महासागर में यात्रा कर रहे एक क्रूज शिप पर सामने आए संक्रमण के मामलों ने इस वायरस को फिर से वैश्विक चर्चा के केंद्र में ला दिया है. कई देशों के नागरिकों से भरे जहाज पर संक्रमण फैलने और तीन लोगों की मौत के बाद दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड में आ गई हैं.
हालांकि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने स्पष्ट किया है कि हंता वायरस कोविड-19 या इन्फ्लूएंजा की तरह तेजी से इंसान से इंसान में नहीं फैलता, लेकिन इसके गंभीर लक्षण और ऊंची मृत्यु दर इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं. WHO की महामारी प्रबंधन निदेशक डॉ. मारिया वान केरकोव ने कहा कि यह वायरस अलग प्रकृति का है और इसका फैलाव सामान्य वायरल संक्रमणों से काफी अलग तरीके से होता है.
क्रूज शिप पर कैसे फैला संक्रमण?
इस समय डच झंडे वाला क्रूज शिप MV Hondius अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में बना हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह जहाज अर्जेंटीना से रवाना हुआ था और इसमें करीब 150 पर्यटक सवार थे. यात्रा के दौरान जहाज अंटार्कटिका और दक्षिण अटलांटिक के कई द्वीपों से होकर गुजरा.
पहला मामला 2 मई को सामने आया, जब जहाज पर मौजूद एक यात्री की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई. बताया गया कि संक्रमण का पहला शिकार 70 वर्षीय डच नागरिक थे, जिन्हें यात्रा शुरू होने के कुछ समय बाद बुखार, सिरदर्द और दस्त की शिकायत हुई थी. उनकी हालत तेजी से बिगड़ी और जहाज पर ही उनकी मौत हो गई.
24 अप्रैल को जहाज सेंट हेलेना पहुंचा, जहां मृतक का शव उतारा गया. उसी दौरान उनकी पत्नी समेत 29 यात्री जहाज से नीचे उतरे थे. बाद में मृतक की पत्नी की दक्षिण अफ्रीका में मौत हो गई. तीसरी मौत एक जर्मन महिला की बताई गई है.
WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस के अनुसार, अब तक पांच पुष्ट और तीन संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें तीन मौतें शामिल हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में और मामले सामने आने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.
किन देशों तक पहुंचा संक्रमण?
हंता वायरस से जुड़े मामलों के बाद कई देशों में सतर्कता बढ़ा दी गई है. संक्रमण से सीधे तौर पर जुड़े देशों में अर्जेंटीना, सेंट हेलेना, दक्षिण अफ्रीका, केप वर्डे, नीदरलैंड और ब्रिटेन शामिल हैं.
इसके अलावा WHO ने उन देशों को भी सतर्क किया है, जिनके नागरिक इस यात्रा का हिस्सा थे. इनमें कनाडा, डेनमार्क, जर्मनी, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, तुर्की, अमेरिका और सेंट किट्स एंड नेविस जैसे देश शामिल हैं.
क्या है हंता वायरस?
हंता वायरस एक गंभीर वायरल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से संक्रमित चूहों और कृन्तकों के संपर्क में आने से फैलता है. संक्रमित जानवरों के मूत्र, मल या लार के संपर्क में आने से यह वायरस इंसानों तक पहुंच सकता है. कई मामलों में संक्रमित धूल के कण सांस के जरिए शरीर में पहुंच जाते हैं.
यह वायरस दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा जाता है- ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस और न्यू वर्ल्ड हंता वायरस.
यूरोप और एशिया में पाया जाने वाला वैरिएंट
यूरोप और एशिया में पाए जाने वाले ओल्ड वर्ल्ड हंता वायरस का असर मुख्य रूप से किडनी पर पड़ता है. यह बीमारी गंभीर हो सकती है, लेकिन इसकी मृत्यु दर अपेक्षाकृत कम मानी जाती है. रिपोर्ट्स के अनुसार, इसमें मौत की दर लगभग 1 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक हो सकती है.
अमेरिका वाला वैरिएंट ज्यादा खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका में पाया जाने वाला न्यू वर्ल्ड हंता वायरस अधिक घातक माना जाता है. यह हंता वायरस कार्डियोपल्मोनरी सिंड्रोम नाम की गंभीर बीमारी पैदा करता है.
इस बीमारी में मरीज के फेफड़ों में तेजी से पानी भरने लगता है, जिससे सांस लेने में गंभीर दिक्कत होती है. शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से गिरता है और स्थिति जानलेवा बन सकती है.
डॉक्टरों के मुताबिक, इस वैरिएंट में मृत्यु दर 35 से 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. यानी हर दो संक्रमित लोगों में से एक की मौत होने का खतरा बना रहता है.
WHO ने क्या कहा?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने फिलहाल स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखी है. WHO का कहना है कि हंता वायरस कोविड की तरह आसानी से एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता, इसलिए व्यापक महामारी जैसी स्थिति की आशंका कम है.
फिर भी स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, खासकर उन देशों में जहां संक्रमित यात्रियों का संपर्क हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती पहचान और तेजी से इलाज इस वायरस से बचाव में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
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