NEET UG Paper Leak: देशभर में लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के समक्ष 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है. माना जा रहा है कि कोर्ट इस आरोपपत्र पर जल्द संज्ञान ले सकता है. हालांकि, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कुछ अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच जारी है.
इस मामले ने एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीबीआई का दावा है कि जांच के दौरान कई अहम सबूत मिले हैं, जिनके आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है.
इन धाराओं के तहत दाखिल हुई चार्जशीट
सीबीआई की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की विभिन्न धाराओं के तहत विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में आरोपपत्र दाखिल किया है. एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका को विस्तार से चार्जशीट में शामिल किया गया है. फिलहाल सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और आने वाले दिनों में कोर्ट की कार्यवाही के साथ इस मामले में नए कानूनी घटनाक्रम सामने आ सकते हैं.
चार्जशीट में 13 लोगों को बनाया गया आरोपी
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट में कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया है. इनमें यश यादव, मंगीलाल बीवाल, दिनेश बीवाल, विकास बीवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रह्लाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंडहरे और मनीषा संजय हवलदार के नाम शामिल हैं. जांच एजेंसी के अनुसार, इन सभी की भूमिका अलग-अलग स्तर पर सामने आई है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन्हें आरोपी बनाया गया है.
मोबाइल फोन से मिला लीक हुआ प्रश्नपत्र
सीबीआई की जांच में सबसे बड़ा खुलासा मंगीलाल बीवाल के मोबाइल फोन से हुआ. एजेंसी के मुताबिक, जांच के दौरान उसके मोबाइल से लीक हुआ नीट-यूजी प्रश्नपत्र बरामद किया गया. जांच में सामने आया कि मंगीलाल ने अपने बेटे विकास बीवाल को परीक्षा में फायदा दिलाने के उद्देश्य से शुभम खैरनार से संपर्क किया था. इसके बाद कथित तौर पर प्रश्नपत्र हासिल करने की पूरी साजिश रची गई.
10 लाख रुपये में खरीदा गया था पेपर
सीबीआई का दावा है कि मंगीलाल बीवाल ने यश यादव से 10 लाख रुपये देकर लीक प्रश्नपत्र हासिल किया था. पूछताछ के दौरान विकास बीवाल ने बताया कि उसकी पहचान यश यादव से राजस्थान के सीकर स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुई थी. जांच एजेंसी इसी कड़ी को आधार बनाकर पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है. सीबीआई का मानना है कि यह मामला केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जा रही है.
एनटीए अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
हालांकि सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन एजेंसी ने आगे की जांच खुली रखी है. विशेष रूप से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कुछ अधिकारियों की संभावित भूमिका की भी जांच जारी है. यदि जांच के दौरान नए सबूत सामने आते हैं, तो एजेंसी पूरक चार्जशीट भी दाखिल कर सकती है. इससे मामले में और लोगों की भूमिका उजागर होने की संभावना बनी हुई है.
12 मई को दर्ज हुई थी एफआईआर
इस पूरे मामले की शुरुआत 12 मई को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत के बाद हुई थी. शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और बाद में जांच सीबीआई को सौंप दी गई. जांच के दौरान डिजिटल साक्ष्य, मोबाइल डेटा, पूछताछ और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाए. अब कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद इस बहुचर्चित मामले की कानूनी प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश कर चुकी है.
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