वाशिंगटन: अमेरिका में काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के चीफ रहे जोसेफ उर्फ जोए केंट के इस्तीफे ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है. ईरान के खिलाफ जंग के खिलाफ दिए गए इस्तीफे के बाद, जोए केंट पर खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप लगाया गया है. इसे देशद्रोह के तौर पर देखा जा रहा है, और अब उनके खिलाफ जांच शुरू हो गई है. जोए केंट ने अपनी बातें सार्वजनिक रूप से रखी, लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति बेहद पेचीदा हो गई है.
खुफिया जानकारी लीक करने का आरोप
जोए केंट के खिलाफ एफबीआई ने जांच शुरू कर दी है. ट्रंप प्रशासन की सिफारिश पर उनके खिलाफ यह जांच हो रही है. जोए पर आरोप है कि उन्होंने युद्ध के बीच महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी लीक की, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए बहुत अहम मानी जा रही थी. अमेरिकी कानून के तहत खुफिया जानकारी का लीक होना एक गंभीर अपराध है, और इसके आरोपी पर यूएस एस्केपियाज एक्ट (1917) के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है. यदि जोए दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें 10 से 20 साल तक की सजा हो सकती है, और कुछ मामलों में आजीवन कारावास का भी प्रावधान है.
जोए केंट के विवादास्पद बयान और आरोप
जोए केंट ने अपनी इस्तीफा देने की घोषणा में कुछ कड़ी बातें कहीं. उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह कहना गलत है कि ईरान अगर हमला नहीं करता, तो वह अमेरिका पर हमला कर देता. उनका कहना था कि ईरान फिलहाल अमेरिका के लिए कोई खतरा नहीं है, और वह इस जंग के खिलाफ नैतिक आधार पर इस्तीफा दे रहे हैं. इसके अलावा, जोए केंट ने यह भी दावा किया कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कोई गंभीर प्रयास नहीं कर रहा है, जैसा कि पश्चिमी देशों द्वारा दावा किया जाता है.
क्या सच में परमाणु हथियार बना रहा है ईरान?
जोए केंट ने अपने इस्तीफे में यह भी दावा किया कि 2004 के बाद से ईरान ने परमाणु हथियार बनाने की दिशा में कोई खास प्रयास नहीं किया है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यह झूठ फैलाया जा रहा है कि ईरान परमाणु हथियार बना रहा है और यह दुनिया के लिए खतरा बन सकता है. उन्होंने कहा कि यह दावा पूरी तरह से गलत है, और इसे गलत तरीके से पेश किया जा रहा है. यह बयान पूरी दुनिया में विवाद का कारण बन गया है.
जोए केंट के इस्तीफे पर ट्रंप के विदेश नीति के फैसले
जोए केंट ने ट्रंप की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए हैं. उनका कहना था कि 2016 में जो नीति बनाई गई थी, उसे 2024 में प्रचारित किया गया था, लेकिन वही नीति ईरान युद्ध में खत्म हो गई. यह बयान उन्होंने "मेक अमेरिका ग्रेट अगेन" अभियान की दिशा में दिया था, जो एक महत्वपूर्ण राजनीतिक बयान था. इसके जरिए जोए केंट ने ट्रंप के प्रशासन की ईरान नीति पर सवाल उठाए हैं और उसे पूरी तरह से विफल करार दिया है.
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