यह अंत नहीं, एक नई शुरुआत है... राज्यसभा सांसदों के विदाई सत्र के दौरान बोले पीएम मोदी; जानें क्या कहा

PM Modi Rajya Sabha: राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों के विदाई सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक अंदाज में अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी भी “पूर्ण विराम” नहीं होता, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जहां हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में देश की सेवा करता रहता है.

This is not the end it is a new beginning PM Modi said during farewell session of Rajya Sabha MPs
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PM Modi Rajya Sabha: राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों के विदाई सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भावुक अंदाज में अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी भी “पूर्ण विराम” नहीं होता, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जहां हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में देश की सेवा करता रहता है.

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सदन के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर कई तरह की चर्चाएं होती हैं और हर सदस्य का उसमें खास योगदान होता है. उन्होंने माना कि बहस के दौरान कभी-कभी मतभेद और खट्टे-मीठे अनुभव भी होते हैं, लेकिन अंत में सभी का उद्देश्य देशहित ही होता है. उन्होंने कहा कि जब विदाई का समय आता है, तो सभी दलों के लोग राजनीति से ऊपर उठकर एक-दूसरे के प्रति सम्मान और अपनापन महसूस करते हैं.

“यह अंत नहीं, एक नई शुरुआत है”

पीएम मोदी ने कहा कि जो सांसद आज विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ भविष्य में फिर से सदन में लौट सकते हैं, जबकि कुछ अपने अनुभव के साथ समाज में नई जिम्मेदारियां निभाएंगे. उन्होंने कहा, “राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता. जो यहां से जा रहे हैं, उनका अनुभव और योगदान आगे भी देश के काम आएगा. भविष्य आप सभी का इंतजार कर रहा है.”

अनुभव की अहमियत पर जोर

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि संसद में काम करने का अनुभव बहुत महत्वपूर्ण होता है और यह जीवन के हर क्षेत्र में काम आता है. जो सदस्य अब सदन से बाहर जा रहे हैं, वे अपने अनुभव के आधार पर समाज और देश के लिए नए तरीके से काम कर सकते हैं.

दलीय भावना से ऊपर उठने की बात

उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर भी जोर दिया कि ऐसे मौकों पर सभी नेता दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एक-दूसरे का सम्मान करते हैं. यही लोकतंत्र की असली ताकत है. कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का यह संदेश साफ था कि संसद से विदाई लेना अंत नहीं है, बल्कि यह एक नई शुरुआत है, जहां से नेता अपने अनुभव के साथ देश की सेवा के नए रास्ते चुन सकते हैं.

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